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रविवार, 17 जनवरी 2010

लो ब्लोग्गर तो टंकी पर चढे ही , अब ये भी .!!!!!



खबर:- भावनाओं में बह कर निशानेबाजी छोडने का फ़ैसला नहीं लेंगे अभिनव बिंद्रा

नज़र :- और ल्यो. ....इहां लोगबाग ई सोच के हलकान (यार इस हलकान शब्द का बडा ही ऐतिहासिक टाईप का महत्व हो गया है हिंदी ब्लोग्गिंग में )हुए जा रहे हैं कि हम ब्लोग्गर बात/बेबात टंकी पे चढ जाते हैं , फ़िर सबके घुडकने से टंकी से उतर आते हैं ।इहां तो ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट निशानेबाज खुदे सबके निशाने पर चढने के बाद टंकी पर चढ के एलान कर दिए कि जाओ , अब नहीं लगाएंगे हम निशाना , तुमही लोग लगाओ , और मच गया हडकंप । अब उनकी ऐसोसियशन ,( अजी अपने जैसा प्रेम थोडी है कि टीप और पोस्ट लिख लिख के उसकी सीढी बना के ब्लोग्गर को टंकी से उतारा जाता है , )भागती फ़िर रही है कि कौन सी लिफ़्ट लगाई जाए कि अभिनव बिंद्रा नीचे उतर आएं । वैसे सुना है कि इसके बाद अभिनव बिंद्रा ने भी कह दिया है कि वे भावनाओं में नहीं बहेंगे ।

एक हम हैं बहना बहाना तो पता नहीं सीधा जंप मार के डूबिये जाते हैं । देखा हमें किसी ने कहा था , तुम्हें गोल्ड मेडल नहीं मिला तो क्या काम तुम्हरा भी उससे कम नहीं है .....अरे परफ़ोर्मेंस का नहीं यार टंकी पे चढने का भाई
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खबर :- यदि अब हुआ आतंकी हमला तो मुंह तोड जवाब देगा भारत :अमरीका ने कहा

नज़र :- अबकि सैम चचा बोले हैं ......वाह ई तो एक दम ईमोशनल अत्याचार टाईप हो गया जी । आखिर ऐसा एंगल चेंज कैसे हुआ जी ? एक तो यार यदि अबकि बार .....यदि अबकि बार ...बार बार ये डायलाग मत मारा करो , तुम लोग तो कुछ करते धरते नहीं हो । आतंकवादी इसे सीरयसली ले लेते हैं और फ़िर कुछ कर देते हैं कि लो अबकी बार भी कर दिया ..कर लो जो करना है । वैसे अबकि बार भारत मुंहतोड जवाब देगा ...ई का ...का मतलल है भाई । कौनो स्पेशल हथौडा दिए हो का गिफ़्ट में ओबामा जी ??? फ़िर आपको कैसे पता कि मुंह तोड ही देगा भारत । देखिए हमारी परंपरा तो आतंकवादियों के मुंह की चुम्मी लेने की रही है , हम आपकी तरह अशिष्ट लोग नहीं हैं कि बदला ले लें ..समझे कि नहीं ..सैमू चचा ॥
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खबर :- प्रधानमंत्री जल्द ही सुनेंगे राज्य के मुख्यमंत्रियों के गिले शिकवे

नज़र :- राम राम राम ! का जमाना आ गया है भाई , बताईये भला कहने को हम लोग प्रजातंत्र हैं और खबर देखिए , प्रधानमंत्री सुनेंगे गिला शिकवा......किसका ....मुख्यंत्री लोग का । अबे कभी जनता का भी नंबर आएगा ....। तुम प्रधानंत्री , मुख्यमंत्री , मेन मंत्री ,साईड मंत्री लोग ही आपस में एक दूसरे के गिले शिकवे कहते सुनते रहोगे तो काहे के लिए कहते फ़िरते हो प्रजातंत्र ...इसे नेता तंत्र क्यों नहीं कहते ? और क्या कह रहे हो , तुम्हारे गिले शिकवे ....अबे अभी भी गिले शिकवे । अबे और कित्ती फ़ैसिलिटी चाहिए तुम्हें , इत्ते नवाबी ठाट बाट , जितने मर्ज़ी अपराध करो , सात खून भी माफ़ , सारे खानदान को नौकरी चाकरी , और अपने अपने हिसाब से घोटाले घपले करने की फ़ैसिलिटि अलग से .तब भी तुम्हारे गिले शिकवे खत्म नहीं हो रहे हैं । सुनिए जी मनमोहिए इन्हीं का आप ...हम तो प्रजा तंत्र हैं जी चलेगा ॥
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खबर :- सहवाग ने बांग्लादेश को साधारण टेस्ट टीम बताया

नज़र :- टेस्ट टीम ....वो क्या होती है जी । हें हें हें अच्छा अच्छा आप वो त्रेता द्वापर युग के क्रिकेट की सहवाग ने ऐसा कहा , ये सहवाग को हमेशा से सच एकदम खुल्लमखुल्ला कहने की बीमारी रही है यार । वैसे इसमें इतना हाय तौबा मचाने वाली कौन सी बात है भाई , जिस अंदाज़ में सहवाग बल्लेबाजी करते हैं उस अंदाज में तो आस्ट्रेलिया भी साधारण टेस्ट टीम लगती है तो बांग्लादेश तो बांग्लादेश है । वैसे भी इतनी बार बार लगातार हारते जाने के हिसाब से तो वो हमें साधारण टीम नहीं लगती एक दम असाधारण टाईप परफ़ोर्मेंस है जी

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खबर :- आस्ट्रेलिया में नहीं थम रहे हमले

नज़र :- अच्छा , बताओ यार तुम लोग तो राज ठाकरे से भी गए गुजरे हो यार । अब तो सुना है कि वो भी तब तक बिहारियों पर हमले नहीं करेगा जब तक चुनाव न सामने हों । अबे उसे तो फ़िर भी पोलटिस करनी है भाई , मगर तुम कंगारू लोग काहे के लिए एतना बावले हो गये हो भाई । एक हमारी सरकार है ससुरी , कौनो क्रिकेटर के साथ कुछ हो जाए , कि खाली ऊ को कोई कुछ बोल भी दे तो पगलाए जाती है, मुदा अपने देश का बचवा सबके साथ ई सब हो रहा तो नामर्दी दिखा रही है । अरे एक ठो आस्ट्रेलियन को अपने इहां भी घसीटो-पीटो , सब अपने आपे ठीक हो जाएगा ।नहीं त भारत कैसे ई सब मामले में बहादुरी दिखाता है ई बात कौनो आस्ट्रेलिया से छुपी थोडे है .......
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खबर :- शाहदरा (दिल्ली) में सरेशाम १७ लाख की लूट

नज़र :- लो तो ई में खबर वाली कौन बात है । ई कि दिल्ली में लूट हुई, सत्रह लाख की हुई आ कि सरेशाम हुई ई । ई में से कौन बात अनोखी लगी जी , कि खबर बना दिए । अरे आज दिल्ली किसी बात में कम थोडे ही है जो लूट जैसी छोटी मोटी वारदातों के लिए रात का इंतज़ार करना पडे । वो भी कितनी रकम के लिए सिर्फ़ सत्रह लाख , अबे इत्ते में आजकल घर भी नहीं मिल रहा । सोचो ये तो है नहीं कि बेचारे लुटेरों ने अपना जीवन संवारने के लिए या फ़िल्मों टाईप कि इसके बाद लूट के पैसों से सारा जीवन अच्छा बन के गुजारेंगे , की भावना से किया होगा । वो तो यार शाम की बातो होगी , ठंड इतनी ज्यादा पड रही है तो जरूर उन्होंने दारू-मुर्गा, पार्टी शार्टी के लिए , बेचारों ने इतनी मेहनत की होगी । अब महंगाई को देखते हुए शाम की पार्टी के लिए इत्ती रकम तो जेनुइन है यार .....छोडो छोडो फ़ालतू की खबर को तूल दे दिया है


चलिए आज के समाचार समाप्त हुए

मंगलवार, 12 जनवरी 2010

हाकी खिलाडियों से करोडों की फ़ैसिलिटी वापस ली जाएगी




खबर :- लौटें या कार्रवाई को तैयार रहें हाकी खिलाडी

नज़र :- हां , बिल्कुल ठीक बात है , यार हद है , बताओ भला राष्ट्रीय खेल के खिलाडी इस तरह से करेंगे तो कितना बुरा असर पडेगा मालूम है। बच्चे तो भूल भी जाएंगे कि राष्ट्रीय खेल हाकी है , और सब क्रिकेट के दीवाने हो जाएंगे । इसलिए इस कदम का समर्थन किया जाना चाहिए । मैं तो कहता हूं कि हाकी खिलाडियों को मिलने वाली तमाम सुविधाएं, लाखों करोडों का बैंक बैलेंस, उनका वो स्टार स्टेटस, विज्ञापन के इतने सारे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय अनुबंध , और इस तरह की तमाम सुख सुविधाएं वापस छीन लेनी चाहिए .....। आयं , क्या कहा ...ये सब तो उन्हें मिल ही नहीं रही है .......अबे तो क्या खाक कार्रवाई करोगे बे...। जब दिया ही कुछ नहीं है तो लोगे क्या ..?????
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खबर :-बार में गोली चलाने वाले विधायक पुत्र को मिली जमानत

नज़र :- इसलिए तो मुझे इस देश की न्याय व्यवस्था पर अभी भी पूरा विश्वास है । एकदम से परख लेते हैं कि कौन किस लायक है । अब बताईये इतनी शानदार क्वालीफ़िकेशन के बाद भी यदि उसे यदि जमानत नहीं मिलती तो फ़िर काहे का न्याय जी । अब विधायक पुत्र है तो गोली ही चलाएगा न , कोई हमारी तरह फ़टा हुआ स्कूटर तो चलाएगा नहीं, और फ़िर बार से उपयुक्त जगह है कोई इस काम के लिए आप ही बताईये भला । और सबसे अच्छी बात तो ये है कि इस गोली से कौन सा कोई जेसिका लाल मर्डर जैसा कुछ हुआ था जो उन्हें जमानत नहीं मिलती । हमें तो इस खबर से जितना भरोसा लोकतंत्र पर हुआ है उतना ही अटूट विश्वास न्यायव्यवस्था पर भी हुआ है
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खबर :-तैरते रेस्तरां पर होगी नीतिश कैबिनेट की बैठक

नज़र :- डूबते हुए राज्य के लिए सारे फ़ैसले तैरते रेस्तरां पर ......व्हाट एन आईडिया सर जी । तभिए न सब कह रहा है कि ग्रोथ रेट देखिए ,बताईये एतना नायाब आईडिया लाए हैं कि सब पानी पानी हो गया है । ओईसे हमको आपका ई उत्तम विचार का टाईमिंग तनिक मिसमैच किया हो नीतिश जी । अपने इहां तो हर साल बाढ अईबे करता है । तब तो पूरा बिहार ही तैरता हुआ रहता है , तब तो चौपाल की बैठक से लेकर , कैबिनेट की बैठक तक सब कुछ एक दम स्वीमिंग करते करते हो सकता था । बताईये हमरा आईडिया आपके वाले से ज्यादा टैण टैणेन है न ????____________________________________________________________________________

खबर :-आश्वासन के बाद भी क्यों नहीं रुक रही आस्ट्रेलिया में हिंसा :कृष्णा

नज़र :- लो जी अब ये और नई बात लो । कृष्णा साहब पूछ रहे हैं कि , भैय्या कंगारू लोग तुम लोग जो वादा किए थे कि अब अपने बबुआ लोगों को नहीं मारेंगे पीटेंगे तो फ़िर काहे नहीं वादा पूरा किए ?? का कृष्णा जी , इ ससुर आस्ट्रेलियन सब को आप चीन्हते नहीं हैं का । सब ई राज ठाकरे का विदेशी आस्ट्रेलियाई संसकरण है जी । मानेगा थोडी, जब उनका क्रिकेट खिलाडी सब बार कुछ न कुछ कर कह जाता है तो ऊ तो आम पब्लिक है । और आश्वासन की बात तो कीजीये मत । आपके पडोस में बैठे , पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, चीन रोजे कितना आश्वासन करता है ???और फ़िर निभाता कितना है ई आपको पता ही होगा । आस्ट्रेलियन सरकार को जरा कायदे से समझाईये /धमकाईये तब समझ में आएगा उनके ॥
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खबर :-ज्योतिषी नहीं हूं जो बता दूं कब सस्ती होगी चीनी ,: पवार

नज़र :-अरे धत तेरे कि क्या पवार साहब । आप पहले बताते कि ये आपका काम नहीं है और ये ज्योतिषी बताएंगे कि चीनी कब सस्ती होगी । आप तो खाली बिना पावर वाले पवार हैं जी । यदि यही बात है तो फ़िर हम खुदे जान जाएंगे , सुन रहे हैं न अपने ब्लोग के ज्योतिषी लोग । जल्दी से बताईये ....अरे हमको नहीं जी .....पवार साहब को बताईये । आखिर ऊ मंत्री हैं कुछ न कुछ तो कहना ही पडेगा न उनको भी ॥वैसे तो इसका एक दम सिंपल जवाब ई है कि चीनी तब सस्ती होगी जब देश वासियों को , लगभग अस्सी प्रतिशत को डायबिटीज हो जाए तो , जरूर सस्ती हो जाएगी ??? ऐसा हमारा आकलन है जी
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खबर :-राष्ट्रमंडल खेल के लिए मच्छरों का होगा सफ़ाया

नज़र :- जे बात ! और सबको लग रहा था कि राष्ट्रमंडल खेलों के लिए कोई तैयारी ही नहीं हो रही है , बताईये भला । देश की एक अति प्राचीन परंपरा ( जिसमें मेहमानों का परिचय मेजबान के घरों के मच्छरों से जरूर हो जाता था ) को भी बदलने के लिए तैयार है सरकार और इसके लिए बाकायदा योजनाएं भी बनाई जा रही हैं । मगर इस सुनहरी योजना में बस एक गडबड हो रही है कि सुना है कि अपने देसी खिलाडियों का कहना है कि उन्हें यदि इस देसी फ़ैसिलिटी( जिसमें उन्हें खटमल मच्छरों के साथ अभ्यास की आदत हो गई है )तो राष्टमंडाल खेलों के दौरान यदि उस सुविधा से वंचित किया गया तो फ़िर बाद में न कहना कि मैडल नहीं ला पाए .....हां नहीं तो कहे देते हैं ॥




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