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गुरुवार, 30 सितंबर 2010

आईये खबरों को पढने का एक ठो नयका तरीका बताते हैं ...अरे आईये तो सही....अजय कुमार झा





खबर :- पाकिस्तान बना अंतरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी का अध्यक्ष

नज़र :- जे बात ......ससुरे चोर को ही चौकीदार बना दिए हो ..अंकल सैम ...तुम्हरी बुद्धि का तो ....एक दम मकबूल फ़िदा हुसैन हो गया है यार ...कमाल करते हो ...इन्हें जब पहले से ही कुछ थोडा बहुत माल जो तुमने सप्लाई किया था ..किया तो यही सोच कर होगा कि ..शायद एकाध रिएक्टर बना लें ....मगर यो ससुरे निकले ...पक्के बिजिनेस वाले ...उनके वैज्ञानिक ने पहले ही ..रेहडी खोमचे लगा कर ...शनि मंगल बजार वाले हाट में ..सब धर के बेच डाला ....जाने कौन भाव बेचा ये भी पता नहीं । अब तुमने ..इन्ने ही अध्यक्ष बना डाला ...यो ठीक किया ....अब आराम से पूरे संसार भर के परमाणुबम के लिए ये ससुरे ..अपने यहां एक मॉल खोल लेंगे ..और अमेरिका के सभी ..नंगे पुंगे दुश्मनों को .....दीवाली बोनांजा में बांट देंगे .....अब भईया अध्यक्ष महोदय जी जो करेंगे ...सो करेंगे , तो फ़िर अब डर काहे का ....ढिंचक ढिचक तुन्नक तुन्ना ...बोलो तारारा रमपम पम .........


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खबर :-विज्ञापन भारत का हाथी अफ़्रीका का

नज़र :- अबे ! पहले ये बताओ ............इस बात से ऑब्जेक्शन किसे है बे ...जरा खुल के बताओ ....सुना है हाथी को तो .,,इंडियन मीडिया एक्सपोज़र .....मिलने से घणी खुशी हुई है ...। वे तो सुना है कि , खबर लीक करने वाले को ..पानी पी पी कर कोस रहे हैं ....उनका कहना है कि , अफ़्रीका में , तो उन्हें कोई घास नहीं डालता ..इससे ज्यादा ..इम्पोर्टेंस तो ......भारत में बकरी को ...और कुत्तों को मिल जाता है ....उन्होंने बताया कि ..अब जबकि common wealth games .में ....कुत्तों तक को वर्ल्ड मीडिया का एट्रेक्शन .......मिल रहा है तो ऐसे में , यदि लगे हाथों ....गलती से ही ....उन्हें थोडा बहुत एक्सपोज़र मिल गया तो इसमें तूफ़ान मचाने वाली कौन सी बात थी .....सुना है कि ..वे इस बात से इतनी बुरी तरह से ...नाराज़ हैं कि उन्होंने ..आईपीएल के आयोजकों तक अपनी बात पहुंचाने की ठान ली है ..ताकि अगली बार ..अपने देश में ट्वेंटी ट्वेंटी के आयोजन के समय वे इस बात का आधिकारिक विरोध दर्ज़ करेंगे ॥


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खबर :- अभी भी पूरी तरह "रहने लायक " नहीं खेल गांव

नज़र :- क्या बात कर रहे हो यार ! ..एक तो बार बार तुम लोग ...खेल ..और गांव...गांव और खेल ..बस इसी का ढोल /पीपा पीटते रहते हो .....अबे एक काम करो ..इससे बढिया तो ..तुम लोग अभी के अभी ..भारत के गांव चले चलो ...सब के सब ..मजे में रहने लायक हैं भईया ...। अबे क्या बताएं यार तुम लोगों को , वो तो यार पापी पेट का सवाल के कारण सब ....इन ईंट पत्थरों के जंगलों में भाग आए हैं ...और भटक रहे हैं खानाबदोशों की तरह ....वर्ना बेटा ..रहने लायक तो अब भी हमारे गांव ही हैं । और ये जो बने हैं न ..ये तो बेटा ...लाईफ़ लॉंग ...कुत्तों के लिए ही बनाया गया है ..देखा नहीं तभी वे पहले से ही ..पोजेशन लिए बैठे हैं ..। वैसे तो सुना है कि ...कुछ कमीने .......जो हमेशा से कुत्तों से भी गए गुजरे रहे हैं .,......और उनका भी हक मारते रहे हैं ...वे लगे हुए हैं इस ताक में कि ..कब ...शेरा का पेडा...बना कर सब खा जाएं ..और उसके बाद वे मजे मजे में सेटल हो जाएं ..। और कम से कम पिस्सुओं के रहने लायक तो ... खेल गांव है ही न .......



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खबर :- अमेरिका में प्रतिबंधित दवा बिक रही है भारत में

नज़र :- ये बात हुई न ..ये होती है बाजार की ताकत .....जो नहीं बिकने लायक है ..जिसे खरीदना मना हो ..वो भी धडाधड बिक जाए ..और ऐसी फ़ैसिलिटी ....सिर्फ़ और सिर्फ़ ...भारत के ग्लोबल मार्केट ही उपलब्ध करा सकते हैं आपको ...। देख रहे हो ..ओ मामा ....अबे ओबामे ..सुन रहा है कि नहीं ..यार एक तो हम तुम्हारा साला एक्स्पायरी डेट माल भी .....ओपनिंग डिलिवरी की तरह खपाए जा रहे हैं ..और सुना है कि तू बार बार ...वो क्या कहते हैं ...यार , बीपीओ ..सैक्टर ( एक तो यार सैक्टर के नाम पर ..हमे तो बस नोएडा के सैक्टर ..बारह तेरह , बीस बाईस ..चंडीगढ के भी इसी तरह से ,....यही पता है ..बांकी के सैक्टर अपने पल्ले नहीं पडते ...) को बंद करने की धमकी देता रहता है बे ..। अबे ओये ..हमने जिस दिन बेटा अपनी पटरी बाजार भी बंद कर दिया न सालों ..तो तुम्हारे यहां मंदी आ जाती है बे .....अबे समझ में आया कि बोलूं ...सन्नी पाजी की तरह ..गदर टाईप से .......बोलूं क्या ...ओएएएएएए...........

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खबर :- टिकट छापे १७ लाख , बिके सिर्फ़ ३.२ लाख

नज़र :- क्या बकवास करते हो .....एक दम झूठ है ये सरासर झूठ .....सफ़ेद झूठ ..वही वाला सफ़ेद ( जो चौंक गए न .......वाले एड में दिखाई देता है ) , अबे दो हफ़्तों तक तो खुद हमें टिकट नहीं मिला था "दबंग "का ..फ़िर ऐसा ...। क्या कहा ..ये दबंग के टिकट के बात नहीं हो रही है ..ये तो common wealth games .के टिकटों की बात हो रही है ..। क्या बात कर रहे हो यार ...उन खेलों को देखने के लिए टिकट भी खरीदने बेचने का पिरोगराम बना डाला था क्या भाई लोगों ..। अमां ..खेलमाडी ..ओह सॉरी ..कलमाडी साहब ...यार पूरा ..शाईनिंग इंडिया ...ही लूट लेने का कार्यक्रम बना रखा था क्या ...। या कहीं ऐसा तो नहीं कि अपने ललित मोदी जी से कौनो शर्त लगाई हो ..कि भईया ..चलो रेस लगालो ...देखें कऊन केतना बडका हाथ मारता है ..लगे मारने आयं ..यही बात है क्या । अबे किसने कह दिया तुमसे कि ....इसके भी टिकिट छापो बे ....अबे यार जब इहां लोग जिस क्रिकेट के लिए पगलाए रहते हैं ...हा हा हा ससुरे ..उसका मजा भी ..पहले पास का जुगाड करके ही लेने की फ़िराक में रहते हैं ..तो अईसे में ..तुम लोगों का ई कूद फ़ांद का , ई रस्सा कस्सी, ई छुपन छुपाई ..और जाने कौन कौन के लिए टिकट खरीदेगा ..अबे सब स्टाफ़ चलाएंगे देखना ..। बेटा बांकी का टिकट तो रामलीला वाला लोग को बेच दो ..उहां तो फ़िर भी बिक जाएगा ...

शुक्रवार, 24 सितंबर 2010

यार ! टायटल नहीं सूझ रहा है ..छोडो मारो गोली ....आप तो बस पढ जाओ .....झा जी पूरे मूड में कहिन







खबर :- खेलगांव में कुत्ते घूम रहे थे ....

नज़र ..हुंह ..अबे जाओ जाओ हमें तो पहले ही पता था ...तुम लोगों चाहे जितना मर्ज़ी ..पैसे वैसे खिलाओ -पिलाओ , सेवापानी करो ..सालों कैमरा देखते ही ...बाय डिफ़ाल्ट ...सच का सामना करने लगते हो ...। क्या कहा बे ..कुत्ते घूम रहे थे ...अबे सालों ...जब तुम खेलगांव को देखने ही कमीनों के साथ गए थे ..तो कुत्ते ही देखने को मिलेंगे न ...क्योंकि हमारे यहां जब से ...धरम पाजी ने एक बार कह दिया कि , " कुत्तों कमीनों " तब से तो यही रूल बन गया है कि ..कुत्ते जहां होंगे कमीने भी वहीं होंगे । वैसे भी ..हमारे पास हैं कुत्ते इसलिए घूम रहे हैं ..तुम्हारे पास जब हैं ही नहीं तो क्या खाक घूमेंगे । हां हां हम समझ गए ..तुम लोग सोच रहे होगे कि ..जब इस खेल का ..प्रतीक शेरा ..यानि शेर है तो फ़िर यहां कुत्ते क्यों ..अबे यार अच्छा पूछा तुमने ..यार तुम्हें तो पता है कि पिछले दिनों यहीं कित्ती बारिश होती रही तो हुआ ये कि ये तो शेरा था न भीग कर ,,,कुकेरा हो गया अब बताओ ..अबे तुम्हें क्या पता होगा ..सालों तुम्हारे यहां तो बारिश भी ....कंप्यूटर पर ही होती होगी ..॥


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खबर :खेल से पहले गिरा फ़ुट ओवरब्रिज

नज़र :- हां तो ........वादा तो यही था न कि ..राष्ट्रमंडल खेलों से पहले ही सारा काम खत्म हो जाना चाहिए ..तो हो गया ..देखो यार ये तो अजीब ..हुल्ल्ड गुल्लड हुई ...आखिर ये पुल उल क्यों बनाए जाते हैं ?? इसलिए न कि एक दिन टूट कर गिर जांए ..और फ़िर एक और पुल बनाया जाए ..और विकास की ये प्रक्रिया सतत चलती रहे ..चलती रहे और चलती रहे ..। अरे यार ..समझ गया ..तुम सोच रहे होगे कि इससे कितनी बेइज्जती हुई है हमारी ...यार तो अब मुंह में ऊगल डाल के सच उगलवाओगे ..अबे काहे की बेइज्जती बे ...पहिले जईसे लपटन साहब सी इज्जत थी तुम्हारी नईं ....अरे उ लोग को अगर तुम शपथपत्र पर लिख कर भी दे दोगे न तो उनका ई विश्वास नहीं मिटने वाला है कि ..भारत में बना है तो गिरेगा ही .......और फ़िर खेलों से पहले गिरा है तो साले को इतनी कवरेज मिली है कि...ठेकेदार कंपनी लाखों खर्च करके भी अपनी कंपनी का नाम न करवा उतना फ़ेमस न करवा पाता ..तो अंत भला ..नहीं नहीं , "शुरू भला तो अंत टला "॥

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खबर :- दिल्ली में पकडा गया पाक जासूस

नज़र :- यार एक तो ऐसी खबरों का एंगल मुझे समझ में नहीं आता ..इसको क्या मानूं ...पकडा गया पाक ............जासूस ...दिल्ली में ..पकडा गया पाक जासूस .....या कि ..दिल्ली में पाक जासूस आखिरकार पकडा ही गया ....साले तीनों ही एंगल एकदम बकवास लग रहे हैं ..अबे पाक का है तो जासूस ही होगा न , जासूस होगा तो पकडा ही जाएगा न , कोई आतंकवादी तो है नहीं ...और दिल्ली में ही पकडा जाएगा न ...आखिर देश के सफ़ेदपोश से लेकर नकाबपोश अपराधी दिल्ली में ही तो पकडे जाते हैं न ..?? मारो यार इस खबर की हेडिंग ही ऐसी है ..कि क्या खाक लिखें ...


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खबर :- शराब पीकर विमान नहीं उडा पाएंगे पायलट

नज़र :- हा हा हा हा . ये हुई न बात ..यदि मुझे सनसनी की टनटनी टाईप से इसे सुनाना होता तो मैं कहता ......अब .....शराब .....पीकर विमान नहीं उडा पाएंगे पायलट .....तो फ़िर क्या पीकर उडा पाएंगे ....भांग , ताडी , ठर्रा , थैली , पाऊच ....अबे जल्दी बोलो बे इत्ता बर्दाश्त नहीं करता ..बडी ओहदे पर बैठा पियक्कड ...। शराब पीकर ......विमान ...नहीं उडा पाएंगे पायलट .....ओह अच्छा अच्छा ...ये कंडीशन सिर्फ़ विमान ड्राईविंग के मामले में ही लागू हुआ न ...यदि ट्रेन चला कर लडा भिडा दें , बस को ट्रक के सामने टिका दें , या फ़िर ..अरे छोडो या लुब्बोलुआब ये कि ..विमान छोड के बेवडे पायलट ..हल से लेकर हलचल तक सब कुछ चला सकते हैं, न सिर्फ़ चला सकते हैं ..बल्कि ठोंक सकते हैं भेड सकते हैं ...। या एक और एंगल है यार . ...अब शराब पीकर विमान नहीं उडा पाएंगे ............पायलट । हा हा हा तो और कौन उडाएगा बे ..वो परिचारिकाएं ,,उन्हें तो टॉफ़ी से ज्यादा मुछ बांटने की ट्रेनिंग ही नहीं दी जाती ..तो और कौन ...सवारियां ..हा हा हा छोडो यार सनसनी नहीं फ़ैल रही ..कमेडी हो रही है ये तो ..॥

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खबर : सब्जियों के दाम आसमान पर

नज़र :- हमें तो ये शक उसी दिन हो गया था जिस दिन , दिल्ली में बारिश का कंट्युनिटी ....ससुरा ट्रैफ़िक जाम की कंट्युनिटी के साथ ,,,पूरी कंट्युनिटी बैठा लिया था कि हो न हो ....ऊपर जरूर ....क्षीर सागर मंडी में ....प्याज का रेट ..काफ़ी ऊपर तक चला गया कि ..अब जित्ती भी मेनकाएं , देवियां , और भांति भांति के ब्लैक एंड व्हाईट के जमाने की हीरोईनों के नाम वाली अप्सराएं हैं ..वे तो भैय्या बिलख बिलख कर रो रही हैं...ज़ार ज़ार रो रही हैं ...और यहां हम समझ रहे हैं कि ससुरे अमेरिकियों के कारों और एसी वाले घरों ने इतना पादा है कि ..ससुरा ग्लोबल वार्मिंग हो गया है । असलियत तो यही थी कि इस बरसाती मौसम में मूड बनाने के लिए ..सारे देवताओं को ..जिस चखने की जरूरत होती थी ..उसके लिए प्याज का होना जरूरी थी ..और फ़िर जो हुआ वो सामने है ..चलो ये कुछ खबर टाईप की थी ..आखिर " टॉप टू बॉटम " तक की कवरेज थी

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खबर :- अब कपडे भी खरीदिए किस्तों में

नज़र :- आयं .....अबे ई का कह रहे हो ...इत्ती मंदी आ गई क्या बे ..। यार अमेरिका वालों एक तो ,जब तक यार तुम लोग कुछ बताते नहीं हो ..साले इस देश को कुछ पता ही नहीं चलता टेम से ..अबे कसूर हमारा भी नहीं है ....अब कारण भी सुनते जाओ ...जानते हो हमारे यहां किस चैनल की टीआरपी सबसे ज्यादा है ..इंडिया टीवी ....हां तो फ़िर , समझ गए न । चलो अच्छा है यार , अच्छा ये बताओ ..कच्छे और बनियान...तो कंप्लीमेंटरी सर्विस में या फ़िर .....श्योर शॉट लकी ड्रॉ .........में देते हो न कि , वो भी बीस आसान किस्तों में ...एक रुपया रोज ..कच्छा धोने के साबुन के लिए और एक रुपया उसकी किस्त ...जस्ट ए फ़िफ़्टी फ़िफ़्टी एडजस्मेंट प्लांट ..नथिंग ...ढका छुपा यार ..चलो पूरा पैकेज का स्कीम फ़ुल डिटेल में भेजना कभी ...
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खबर :-स्लम विभाग में साढे तीन करोड की हेराफ़ेरी

नज़र :-हा हा हा ...................अबे ये क्या खबर है भाई ..नाम स्लम विभाग .......यानि झुग्गी डिपार्टमेंट ..तो उस हिसाब से तो इसमें हेराफ़ेरी ..ज्यादा से ज्यादा बमुश्किल ....साढे सत्रह रुपए से लेकर ..उन्नीस बीस रुपए तक के बीच में होना चाहिए था ....मगर ये क्या कहा है भाई ...सौ ,हज़ार ,लाख नहीं ....डायरेक्ट करोड ..बल्कि करोडों ...हा हा हा अबे एक बात बताओ .....ये जो करोडों की हेराफ़ेरी कर डाली भाई लोगों ने फ़िर मतलब कि टोटल स्कोप तो और भी ज्यादा था ....तो जब इत्ते करोड का कुल बजट है तो सीधे सीधे उन झुग्गी वालों को दे क्यों नहीं देते ...इत्ते में तो वे सब मजे में सेटल हो लेंगे ...। फ़ि तो बेटा .....इस स्लिम ..ओह स्लम विभाग की जरूरत ही नहीं रहेगी ...हा हा हा ओह ! तभी तो ये नहीं किया जा रहा है ..जय हो स्लम विभाग और करोडो का हेराफ़ेरी ..............

अब चलें ..अबे भाई लोगों ..इत्ता आज ही हंस लोगे तो कल .......

रविवार, 19 सितंबर 2010

प्लास्टिक छोडें , थैला पकडें : शीला दीक्षित ......अरे थैला क्या ...सीधा कटोरा ही पकड ले पब्लिक अब तो

खबर : अयोध्या मामला जाएगा सुप्रीम कोर्ट : आडवाणी


नज़र
:-जी बिल्कुल दुरुस्त फ़रमा रहे हैं लौह पुरूष .....जाना ही चाहिए ..वैसे भी जो मामला सुप्रीम कोर्ट न पहुंचे ...तो फ़िर काहे का मामला जी ..वैसे भी हमारी सुप्रीम कोर्ट खाली बैठी है न .....कोई काम ही नहीं है ...वे तो कह रहे हैं कि ....भेजो जी भेजो और मामले भेजो ..। मगर आडवाणी जी ....इस मामले को साठ बरस हो चुके हैं ....चलते चलते ...। देखिए आप लोग बार बार साठ बरस साठ बरस कह के ..मेरी और वाजपेयी जी की तरफ़ तीर क्यों चला रहे हैं ....जब हम पचहत्तर अस्सी तक चल रहे हैं तो फ़िर ये तो अभी साठा माने पाठा ही हुआ है ...। मगर क्या सुप्रीम कोर्ट जाने से मामला हल हो जाएगा .....। अरे मामला हल हो ...या मामला बैल हो .....बस चलते रहना चाहिए ....तभी तो इस मुद्दे पर अपनी खेती चलती रहेगी ......तो प्रेम से बोलिए ....जय श्री राम ।
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खबर
:-महंगाई चरम पर पहुंचने को तैयार .
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नज़र :- लो तो इसका मतलब अभी चरम पर नहीं है ...अबे तो क्या भरम पर है ...........इत्ती तो हो ही रही है ...तुम्हारा ये चरम वाला लैवल क्या है बे ...ये भी जरा खुल कर बता ही दो ........और जब वो ससुरी पहुंचने को तैयार ही है ...तो काहे का अल्टीमेटम ...दन्न से पहुंच जाने तो उसे .....हम तो तैयार हईये हैं ...जाने कब से ..युगों युगों से ....। हाय एक बार हमें भी चरम तो देखना ही है .....फ़िर चाहे उसके बाद ....एक ठंडी सांस के साथ .....हे राम ...निकल जाए .....और भले उसे अयोध्या मुद्दे से जोड कर सब देखें .....मगर अब तो चरम देखना ही है ......तो कब तक की उम्मीद है ...क्या कहा ...खेल चल रहा है ....खेल खतम पैसा हजम ॥ ______________________________________________________

खबर
:- प्लास्टिक छोडें , थैला पकडें : शीला दीक्षित ....
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नज़र
:- जी इसे कहते हैं दूरदर्शी मुख्यमंत्री .........प्लास्टिक छोडें , थैला पकडें .....। और एक बार जैसे ही थैला पकडने की आदत पडी ..........हें हें हें ....कटोरा पकडने में कितनी देर लगेगी आम पब्लिक को ....वैसे भी शीला दीक्षित जी ने ...पिछले दिनों ...राष्ट्रमंडल खेलों के बहाने से इत्ते जोरदार आइडियाज़ लागू किए हैं और जिस तरह से उनका बजट जुटाया है , फ़िर अभी तो करोडों के गुब्बारे , कुर्सियों , पंखों , दरियों का किराया देना भी बांकी है । मेट्रो की जनता क्या इतनी भी समझदार नहीं है कि समझ सके कि , उन्हें सीधा कटोरा पकडने को कहने जैसा ...अनकलचर्ड काम .....कभी भी शीला नहीं कर सकतीं ....अरे ये कांग्रेस की परंपरा ही नहीं रही जी ............हां कटोरा आप प्लास्टिक का भी ले सकते हैं ...अरे यार उसमें कोई मना नहीं करेगा ....॥
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खबर
:- अब हुई बारिश तो बह जाएंगे बांध ...



नज़र
:- तो न हो बारिश ....मतलब अब बारिश भी तुम लोगों की बांध की ऊंचाई चौडाई , मजबूती कमजोरी ...का पूरा स्टेटस देख कर बारिश हो ...अब भैया ये तो वरूण देवता को पेजर पर मैसेज करना पडेगा कि ..देखो प्रभु ..ये आऊट औफ़ सिलेबस बारिश करवाने की आपको ऐसी क्या जरूरत आन पडी थी ...हम इंसान ,,,खासकर मैट्रो टोनियल इंसान लोग तो ये भूल भी चुके थे कि बारिश ऐसी भी हुआ करती थी कभी ....और अब तो देखो आप स्थिति बांध को बांधने खोलने और टूटने तक पहुंच चुकी है ....अब तो ..अच्छा बांकी की बात अलग से मेल करके बताऊं ...चलिए ठीक है ...
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खबर :- राष्ट्रमंडल खेलों में होगी १२० फ़ीसदी सुरक्षा की गारंटी : गिल

नज़र :- वाह ! ये होता है कॉंफ़िडेंस ....देखा सौ फ़ीसदी नहीं पूरे एक सौ बीस फ़ीसदी .....वैसे गिल साहब आपको पक्का यकीन है कि आप ये बयान सोच समझ के दे रहे हैं कहीं ऐसा तो नहीं कि , बाद में आप गिल नहीं गिल्टी हों ....। क्या कहा ....अब सौ फ़ीसदी कहने पर कोई यकीन नहीं करता ....पिछली बार भी जैसे ही हमने सौ परसेंट कहा था ..ये कसाब की टीम ने सारा एनालिसिस खराब कर के रख दिया था ....इसलिए इस बार प्रतिशत बढा दिया गया है ...वैसे भी राष्ट्रमंडल खेलों के लिए सब कुछ बडा किया जा रहा है तो हमने कहा ये भी लो । जिसने हमारे सौ फ़ीसदी पर यकीन नहीं करना ...उसने ऊपर के बीस पर अपना टाईम खोटी थोडी करना है ....समझते नहीं हो आप _______________________________________________________

खबर
:- राष्ट्रमंडल खेल और रामलीला होंगे साथ साथ


नज़र
:- अच्छा , अच्छा ..दोनों का समय साथ साथ आ गया है इसलिए , क्या कहा नहीं ....मैं गलत समझ रहा हूं फ़िर । दरअसल कहने का मतलब ये है कि जब राष्ट्रमंडल खेल चल रहे होंगे तब सरकार जो कर रही होगी वो रामलीला से कम नहीं होगी ...। लंका दहन की तैयारी पूरी हो चुकी है बस ...थोडा सा फ़ेरबदल ये है कि ....दहन की जगह पर ..लंका डूबन की तैयारी की गई है .....। तो प्रेम से बोलो .....अरे छोडो यार ...मन करे तो बोलो ...न मन करे तो ...

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