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सोमवार, 13 दिसंबर 2010

आज की ताजा खबर ..आज की ताजा खबर ..दो रुपए साहब ...सिर्फ़ दो रुपए ...पढिए न





खबर :- अदालत में ही भावुक हो गई पूर्व अधिकारी

नज़र :- हा हा हा कौन थी रे एतना इमोसनल अधिकारी ..ओहो नीरा मैडम ...ओह नीरा कोई न जाना तेरी पीर ..इत्ता बडा घोटाला फ़िर भी आखों में नीर । अरे तो इसमें खबर क्या है बे । अबे ओ ई तो अब आम पब्ल्कि को पता हईये है कि जईसे ही अदालत में उपस्थित होता है ...ई तमाम मासूम लोग सब पहिले इमोसनल हो जाता है ..फ़िर लप्प से अगिला दिन कौनो फ़ाईव स्टार होटल ओह अस्पताल में जाके घोलट जाता है कि ई कह के ...उनका दिल कमजोर है ..और सरकार और आम जनता द्वारा उनको पकड के उनके कमज़ोर दिल को और भी कमज़ोर करने का भयंकर अपराध किया गया है इसलिए उनका इमोसनल होना और पेसेंट होना भी ..बनता है यार ..एकदम किटकैट ब्रेक की तरह

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खबर :- पाकिस्तान से आतंक मंजूर नहीं सरकोज़ी

नज़र :- अच्छा , मतलब पहली बार हुआ है कि किसी ने आतंक की क्वालिटी पर सवाल उठाया है ..कि नहीं जी हमें तो पाकिस्तान से आतंक मंजूर नहीं ..एकदम खालिस क्वालिटी का ओसामा मुजाहिद्दीन का आतंक मंजूर है । मगर सर कोजी जी ,जी ...ई कोई बात नहीं हुआ ..अरे नहीं मतलब कि यार ई कौन मतलब हुआ जब पूरा वर्ल्ड पाकिस्तान से ही आतंक का खेप मंगा रहा है तो आप उसमें कैसे आपत्ति कर सकते हैं जी । अरे विश्वास नहीं है आपको ई साला अपना अमरीका भी अईसन बुडबलेल देश है कि उउ भी साला जाने केतना पैसा दे दे के आतंकवाद खरीदता है पाकिस्तान से अपना लिए ....हा हा हा बताईये है न ट्रेजडी ..अरे भाई जो अलेल बलेल पैसा देते हो ..कभी पूछे हो कि उ पैसा से केतना लोग को घर बार बना के दिया है ..अरे फ़िर भी पाकिस्तान से ही आतंक का वर्ल्डवाईड डिलिवरी होता है यार ..इहे दस्तूर हो गया है न

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खबर :- डीडीए फ़्लैट्स के लिए सात लाख फ़ार्म बिके

नज़र :- बिक गए ..साला इतना घोटाला घपला होते रहने के बावजूद बिक गए ...ओह कितना बिकाऊ बिकाऊ टाईप समाचार है यार । हम अईसा समाचार सुनते हैं तो सोचते हैं कि ..अबे क्या है बे ..एक तरफ़ तो घटोला , भ्रष्टाचार जाने कौन कौन नारा उरा धांय धांय उडाते रहते हो ..और जब समय आता है तो ..लो जी सात लाख तो अब तक आ गए हैं ..अरे अभी तो लास्ट डेट में बहुत लेट है जी ....अब ई डीडीए का एक स्टॉफ़ प्रति घंटा के हिसाब से भी धरोगे घूस लेते तो मानेगा ..न न ..एतना पईसा से ओईसे ही लोग जोसियाया रहेगा ..बेचो बेचो ..हम तो कह रहे हैं कि साला डीडीए को अब ..एक ठो फ़ार्म में ई नहीं लिखे कि फ़्लैट कहां मिलेगा ..आ भरवा ले सबसे फ़ार्म आ बाद में जाके अंडमान निकोबार में दे दे सबको एक एक द्वीप अलॉट करके ..कि लो रे लॉटरी खुल गया तुम लोग का ..अब बेच के दिखाओ इसको दुगुना तिगुना दाम पर ..

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खबर :- मायावती ने किया १५ योजनाओं का लोकार्पण

नज़र :- अरिस्स ..कर दीं बहन जी ...एक तो बहन जी ..जब तब लोकार्पण कर देती हैं ...अरे आप बहन जी हैं ..तो इस हिसाब से आपको साल भर का लोकार्पण रक्षाबंधन के दिन ही करना चाहिए । ओह अच्छा अच्छा तो ई कहिए न महाराज ...मायावती कही हैं कि पंद्रह में से सोलह योजना है मूर्ति बना के गाडना ..आ चाहे गाड के मूर्ति बनाना ..ओहो तो इसमें परेसानी वाला कौन बात है अरे पंद्रह में से सोलह माने कि ..मूर्तिया एक एक्स्ट्रा लेके न चलना होता है ...आखिर संविधान का पूरा भार उठाए रहते हैं न ..आ अब तो उसमें संशोधन भी होते रहता है रोज रोज ..इस लिए ..तो यूपी को ई नयका मूरुतिया सब ...बहुत मुबारक हो ...कुछ दिनों में ही नारा लगेगा ..यूपी में है दम , क्योंकि यहां आदमी हैं कम ....अरे जादा मूर्तियां न हो जाएंगी एक दिन ..

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खबर :- सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ़ व्यापारी लामबंद

नज़र :- किसके खिलाफ़ बे ...लामबंद हो रहे हो ...नहीं हो जाओ , देखो उसमें कोई खास ऑजेक्शन नहीं है हमको लेकिन जो चीज़ है ही नहीं ...अबे एक बात बताओ ..साला अब भी तुमको ई पूछने बताने का जरूरत है रे कि सरकार कोई आर्थिक नीतियां नहीं हैं ..अबे आर्थिक क्या अब तो सबको लग रहा है कि कौनो टाईप की नीतियां नहीं हैं ..और जिस हिसाब से फ़ीलिंग का भाव गिर रहा है कुछ दिनों में तो लगने लगेगा कि सरकार भी नहीं है .,....हां व्यापारी सब को लामबंद होना ही चाहिए ...मगर यार नक्काली के खिलाफ़ होओ न यार ..मतलब कुछ तो लॉजिक होना न चाहिए

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खबर :- गतिरोध जारी , कहीं बेकार न हो जाए सत्र

नज़र :- अबे छोडो बे नाटक है ई सब ...बेकार न हो जाए सत्र ...यार सत्र को तो चलो ई मान लेंगे कि एक बार और सत्र बेकार गया ..मगर यार अब तो लगता है कि संसद ही बेकार है .;..और सुने हैं कि एक ठो मुखमंत्री जी भी यही बोले हैं कि राज्य सभा की का जरूरत है ...तो जरूरत के हिसाब से न राज्य सभा की जरूरत है न लोक सभा की और न ही आम सभा की ..अबे सभा करना कोई जरूरी है रे ..तुम लोग के सभा उभा से साला आज तक एक आदमी का भी पेट भरा हो तो बताओ ...अरे और लोगन का छोडो ..तुम लोग का ही पेट नहीं भरा है यार अब तकले ..केतना तो आजादी के बाद से सभा करते आ रहा है ..इसका आधा सभा के आयोजन में तो अंग्रेजवा सब भाग गया था देस से

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खबर :- आमिर दस किलो वजन घटाएंगे

नज़र :- हां तो घटाओ घटाओ ......अरे यार ई घटाओ बढाओ वाला फ़ैसिलिटी तुमही लोग को अवेलेबल है भाई ..साला बाल कटा लोगे तो वजन कम हो जाएगा ..बढा लोगे तो खली बन जाओगे ..ओईसे भी सुने हैं कि मंगल पांडे के बाद गजनी करने के लिए तुम जैसे ही टकले हुए न तो दस किलो वजन कम हो गया था तुम्हारा रे ...हम तो बस एतना जानते हैं कि तुम चाहे कौनो इडियटपना करो ..मगर आदमी तुम जीनियस है रे ....इसलिए ..जल्दी लाओ ..आमिर खान का स्लिम मौडल ..साले नोकिया स्लिम को भी कांप्लैक्स हो जाएगा इससे ।

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खबर :- डाकघरों में खाली पडे हैं पचास हजार पद

नज़र :- देखो रे , जिस हिसाब से लोग अब चिट्ठी लिखना छोड दिया है उस हिसाब से डाकघर में , मदर डेयरी का बूथवा न तो परचून अरे किराना का मर्दे और का , दुकान गुमटी सब खोल देना चाहिए । पद खाली पडे हैं का तो ....अरे पचास हजार पोस्टकार्ड और अंतर्देशी भी नहीं लिखा जा रहा है आज ..ऊ भी खाली पडा है उसको भरने का है कौनो जोगाड नहीं न । तो फ़िर पडे रहने दो खाली उन पदों को भी

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खबर :- २४ घंटे बाद भी पुलिस खाली हाथ

नज़र :- अबे कौन पुलिस है बे ..इतनी काहिल ..यहां मिनट के हिसाब से कमाई हो जाता है और ई है कि चौबीस घंटे बाद भी खाली हाथ ही घूम रही है । ओह अच्छा अच्छा कह रहे हो कि अपराध का सुराग नहीं मिला ..अबे तो पक्का सीबीआई होगी ...हां यार पिछला कै बरस से सीबीआई को इंफ़ुलैंजा हो गया जब देखो नाक कान बंद रहता है न बेचारा सब कुछ सूंघ पाता है और न देख पाता है और ऊ कौन केस था ..हां आरुषि मर्डर केस ..उस केस में तो कहना चाहिए कि ..दुई जनम के बाद भी पुलिस खाली हाथ रही

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खबर :- पुलिस ने आसाराम बापू की गाडी से लाल बत्ती हटवाई

नज़र :- गलत किया एकदम ..ई काम का हक पुलिस को एकदमें नहीं होना चाहिए था ..अरे पुलिस हैं तो उनको लठियाईये ..उनके गाडी को काहे कुछ कहा गया ..ओईसे भी जब से साला नेतवा सब लाल बत्ती लगाने लगा है उससे जादे इज्जत तो रेड लाईट एरिया का रह गया है ...मारो साला लाल बत्ती का भी कोई इज्जत है का ? तो पुलिस ने अब हटवा ही दिया है तो बापू अब का करेंगे ?बताओ यार एक ऊ बापू थे एतना सा लंगोटी पहने के आजादी का लडाई लड लिए ..और एक ई बापू हैं इनको रेड लाईट भी चाहिए ..हे राम अब किसकी आस करें ...

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खबर :- पच्चीस वर्षों तक ईंधन देगा फ़्रांस

नज़र :- अच्छा ठीक है तो लें लें न फ़िर सीएनजी वाला कार ..नहीं सुनो फ़्रांस वैसे देस कैसा है .....मतलब कल को हम कार खरीद लें और कहीं लॉंग रूट ड्राईव का योजना बनाएं और जाने से पहले ही कह दे कि न हम न देंगे अपने गोबर गैस पर जाईये लॉंग ड्राईव पे ..तो हो न गया बंटाधार । नहीं न नहीं करेगा ..अच्छा क्या क्या देगा ईंधन में ..नहीं बता दीजीए न यार ...देखिए हो फ़्रांस जी यार जादे घासलेट देना ..हम जानते हैं कि दिल्ली मूबई से बाहर रात को भारत इसी घासलेट के सहारे सोता जगता है अब भी

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खबर :- प्लास्टिक पाऊच में नहीं बिकेगा गुटखा

नज़र :- बाह बाह का बात है का बात है ...अब तो खा लू तिरंगा गोरिया हो फ़ाड के ..जा झाड के टाईप का गाना गाएगा भाई चिब्बौका लोग ।अच्छा अच्छा तो सरकार जरूरे ई सोच रही होगी कि , एक ठो मोटा गैस पाईप लाईन की तरह गुटखा लाईन भी बिछा डालते हैं ..सब मुंह में डायरेक्ट घुसेड के चिबाएगा तो प्रोफ़िट जादे होगा । ओहोहो नहीं रे सरकार प्लास्टिक को रोकने के लिए अईसा सोची है . तो हमारे हिसाब से अईसा काहे नहीं कर देती है कि ..बोतलवा में गुटखा बेचे और पाऊच में शराब ..गज्जब्ब का आइडिया आया है सरकार को ।

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खबर :- नहीं सुधर रही महिला अस्पताल की हालत

नज़र :- आयं ..अरिस्स ..ई का रे ..बताओ अस्पताल भी पुरूष और महिला होता है रे ..हम तो अस्पताल को साला न्यूट्रल जेंडर समझ रहे थे ..चलो मान लिया तो । अब ई बताने वाला बात है रे ...जब महिला सब का हालत नहीं सुधर रहा है ..और ऊ भी तब जब ..प्रतिभा , सोनिया शीला ..जाने केतना केतना वुमैन ..पावर वुमैन सब है सत्ता में ...महिलाओं पर अत्याचार करने वालों को काहे नहीं धर धर के सूत देता है लोग पता नहीं । सुनिए हो .लेडिज़ अस्पताल जी आपका हालत जैसा है ..फ़िलहाल तो उसी पर गुजारा करिए ..बकिया बाद में देखते हैं

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खबर :- गरीब बच्चों के लिए बाल फ़िल्म महोत्सव

नज़र :- छी छी छी ..अबे तनिक तो सरम रखो यार देह में ..बच्चे भी कभी गरीब होते हैं ..अबे बच्चे तो बच्चे होते हैं ..न गरीब ,न अमीर , न किसी धर्म के जाति के ..और साले जौन देस में बच्चे गरीब होते हैं न ..ऊ देस दलिद्दर का दलिद्दर ही रहेगा । और एक बात बताओ बे ..अगर बच्चा गरीब है तो साले उसके खाने का ओढने पहिनने का इंतजाम करो न यार ..सलीमा उलीमा तो देखिए लेगा ..ओईसे भी .सीला के जबानी को देखने के लिए पहले बच्चा सब बराबर जबान तो हो जाए ..है कि नहीं ..

21 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सही झा जी ... सही नब्ज़ पकडे है खबरों की ... लगे रहिये जी !!!

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  2. बड़ी मेहनत करते हैं संकलित करने में खबरें। आप अच्छे रनडाउन प्रोड्यसूर साबित होंगे।.

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  3. शुक्रिया शिवम भाई ,
    पोस्ट को पढने और सराहने के लिए भी और उसे वार्ता में शामिल करने के लिए भी । आभार

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  4. विनीत भाई ,
    आपकी टिप्पणी पोस्ट का मान बढाती है , शुक्रिया

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  5. sawee sawere i ka sasuri bhrast shiromani kee photo diklaa deenee

    tune o ajayywa hamaare suvah bhrash kar deene.

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  6. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  7. हा हा हा हरि भाई अब तो देख लीहीन आप अब का ..हा हा हा ।

    शुक्रिया हरि भाई

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  8. शुरू किया तो लगा कि खबरों का चयन बढि़या होता है, अब समझ में आ रहा है कि खबर कोई भी हो वक्रदृष्टि जहां पड़े वहीं असर दिखाती है.

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  9. इतनी सारी खबरें मात्र दो रूपए में ? रेट बढाइये जनाब !

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  10. मुझे लगा रहा था की सभी खबर बस दू रूपया में देंगे तो अर्थ व्यवस्था ना गड़बड़ा जायेगा आप का, पर रजनी फंदा का विज्ञापन देख कर पाता चला की आप की खबरों को अब विज्ञापन भी मिलने लगा है | सुकर है की ई महगाई के ज़माने में कोई चीज तो है जिसका दाम ना बढेगा | खबर के साथ ही विज्ञापन भी अच्छा था |

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  11. वाह वाह! अजय भाई क्या बात है!!!!

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  12. ‘डीडीए फ़्लैट्स के लिए सात लाख फ़ार्म बिके’

    तो समझ लो भैये कि दिल्ली बिक गई बाहर वालों के हाथ :)

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  13. अरे तो आप कौन से अपने थे उनके ..भर ही डालते एक आध लाख तो आप भी ..आखिर डीडीए के प्रसाद का हक तो आपको भी होना चाहिए न :)

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  14. अरे बस भी कीजिये साहब लोगों के कितना लठियाईयेगें........

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  15. हा हा सही है भैया...मस्त खबरिंग चल रही है :)

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  16. आपकी रचना वाकई तारीफ के काबिल है .

    * किसी ने मुझसे पूछा क्या बढ़ते हुए भ्रस्टाचार पर नियंत्रण लाया जा सकता है ?

    हाँ ! क्यों नहीं !

    कोई भी आदमी भ्रस्टाचारी क्यों बनता है? पहले इसके कारण को जानना पड़ेगा.

    सुख वैभव की परम इच्छा ही आदमी को कपट भ्रस्टाचार की ओर ले जाने का कारण है.

    इसमें भी एक अच्छी बात है.

    अमुक व्यक्ति को सुख पाने की इच्छा है ?

    सुख पाने कि इच्छा करना गलत नहीं.

    पर गलत यहाँ हो रहा है कि सुख क्या है उसकी अनुभूति क्या है वास्तव में वो व्यक्ति जान नहीं पाया.

    सुख की वास्विक अनुभूति उसे करा देने से, उस व्यक्ति के जीवन में, उसी तरह परिवर्तन आ सकता है. जैसे अंगुलिमाल और बाल्मीकि के जीवन में आया था.

    आज भी ठाकुर जी के पास, ऐसे अनगिनत अंगुलीमॉल हैं, जिन्होंने अपने अपराधी जीवन को, उनके प्रेम और स्नेह भरी दृष्टी पाकर, न केवल अच्छा बनाया, बल्कि वे आज अनेकोनेक व्यक्तियों के मंगल के लिए चल पा रहे हैं.

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  17. आपका कार्य प्रशंसनीय है, साधुवाद !

    हमारे ब्लॉग पर आजकल दिया जा रहा है
    बिन पेंदी का लोटा सम्मान ....आईयेगा जरूर
    पता है -
    http://mangalaayatan.blogspot.com/2010/12/blog-post_26.html

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हमने तो खबर ले ली ..अब आपने जो नज़र डाली है..उसकी भी तो खबर किजीये हमें...

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