गुरुवार, 8 अक्टूबर 2009

बाढ राहत के लिये पैसों की कमी नहीं....बस घोटालेबाज नहीं मिल रहे...

खबर :-अपमान से व्यथित हो रो पडी उडन परी..

नज़र :- गलत हुआ जी बिल्कुल गलत ....अरे अपमान नहीं जी...वो तो देर सवेर होना ही था...जितनी जल्दी हो गया उतना अच्छा......आगे के लिये टेंशन खत्म ....और फ़िर ये तो और भी अच्छा हुआ कि उनके जीते जी उनको ये सम्मान हासिल हो गया..अन्यथा ध्यानचंद जी जिनके जन्मदिवस पर सरकार खेल दिवस तक मनाती है ..उन्हें तो मरने के बाद ही ये हासिल हो पाया.....और अब प्रति वर्ष सिर्फ़ एक दिन उनके साथ ऐसा किया जाता है...गलत तो ये हुआ कि ..उडन परी रो पडी...बताईये भला इसमें रोने की क्या बात थी.....अब अगले साल हो रहा है राष्ट्र मंडल खेल हो रहे हैं न.....तब तक कुछ और उडन परियां, कुछ और खेल योद्धा तैयार करती जो देश के लिये पदक वदक जीतते ...और फ़िर थोडे सालों बाद ऐसे ही किसी जगह ....सम्मान करा रहे होते......वैसे सुना है कि इससे देश के खिलाडियों को बहुत प्रेरणा मिली है......।


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खबर :-बाढ राहत के लिये पैसों की कमी नहीं..

नज़र : - लो तो हमने कब कहा कि हमारे यहां पैसों की कोई कमी है .....अब तो ये जग जाहिर हो गया है जी...जो देश सौ रुपये किलो दाल खरीद कर खा सकता है....चालीस रुपये किलो दाल..अजी छोडिये सारा राशन का नाम लें का...मतलब ये कि जो इतना साहस कर सकता है...ऊ भी इतना मंदी के दौर में...ऊ देश में पैसे की का कमी रहेगी का......सरकार के कहने का मतलब है कि पैसे तो खूब हैं जी राहत के लिये बांटने को...मुदा ई बाढ ही टाईम पर धडाधड नहीं आती है न...सारा पैसा वेस्ट होता रहता है....का कह रहे हैं ई मतलब नहीं था.....ओह तो ई बात है...दरअसल पैसा तो भरपूर है .मगर घोटालेबाज मंत्री अधिकारी लोग ..मतलब टैलेंटेड लोग मिल नहीं रहे हैं...अरे नहीं जो हैं न उनका सबका रिकार्ड तो पहले से ही मौजूद है...अब तो नये फ़ेस की तलाश

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खबर :- राजधानी में महिलायें असुरक्षित...

नज़र :- अबे इसमें खबर कौन सी है बे.....महिलायें असुरक्षित हैं ये....यार राजधनी में असुरक्षित हैं ये.....या फ़िर ये कि असुरक्षित हैं ये.....सब बकवास बात है जी...ई कहिये कि दे़श , समाज और परिवार तक में महिलायें असुरक्षित हैं............आज कोई भी ऐसी जगह नहीं है ...जहां के लिये ये कहा जा सके कि महिलायें सुरक्षित हैं...अब सुन लो तनिक राजधानी की...तो ई बात तो उसी दिन प्रमाणित हो गयी थी..जिस दिन देश की प्रथम महिला आई पी एस ..किरन बेदी को तमाम षडयंत्र रच कर दिल्ली पुलिस का कमिश्नर बनने से रोक दिया गया....और बिल्कुल नागवार गुजरने वाले तरीके से उन्हें नौकरी से अवकाश पर जाने को मजबूर कर दिया गया......खाक समाचार है ये..

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खबर :- हसीना को पासपोर्ट न देने की वकालत ......

नज़र :- अरे ई का हो गया है भई पासपोर्ट विभाग को ...जरूर ई सब महंगाई का असर है ..बेचारे लोगन को दाल खाने को नहीं मिलता होगा तो ईहे अनाप-शनाप निर्णय लेंगे न.....हसीना को पासपोर्ट नहीं देंगे ...तो देंगे किसको जी....और किसने इजाजत दी उनको ऐसी वकालत करने की....हम अभी जी से शिकायत करते हैं....का कह रहे हैं.....बात हो रही है अंडरवर्ल्ड डौन दाऊद इब्राहिम कासकर की बहन हसीना पारकर का....अरे बाप रे ...ई तो कातिल हसीना निकली जी...इनका तो पासपोर्ट नहीं...राशन कार्ड भी नहीं मिलना चाहिये....एकदम ठीक वकालत की है जिसने भी की है....अब हर कोई..कसाब मियां के वकील साहब की तरह का वकालत तो नहीं कर सकता न...


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खबर::- युक्ता मुखी चली सलमान,शाहरुख की राह ..

नज़र :- अरे यानि युक्ता भी अब बौडी शौडी बनायेंगे...सिक्स पैक....वाह कमाल का आईडिया है जी.....क्या कहा ..उनका ये मतलब नहीं था...दरअसल उनका कहना है कि वे भी टीवी शोज होस्ट करेंगी ...अरे धत तेरे की ..या क्या....तो ये कहिये न कि आप राखी सावंत से टक्कर लेना चाहती हैं...लिजीये तो क्या गलत कहा मैंने..टीवी पर भी तो वही होस्ट चमक रहे हैं न जो पहले से ही चमके हुए हैं..नहीं तो आप ही बताओ न.....अपने राहुल राय, और दीपक तिजोरी भी न करे रहे होते होस्ट...चलिये आप तो किसी भी राह चलिये जी...का फ़र्क पडता है।

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तो ठीक है न आज एतने समाचार है खास खास...

मंगलवार, 6 अक्टूबर 2009

दारू पीने वालों के लिये अच्छी और बुरी खबर ..

चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

खबर :- सार्वजनिक स्थल पर शराब पी तो पचास हज़ार जुर्माना

नज़र :- यार ये तो जुलम है जी...सरासर जुलम। ऊपर से ये भी नहीं बताया कि - ठर्रे, पव्वा, अद्धे ...के लिये जुर्माना राशि की रेंज़ अलग अलग होगी या एक जैसी। मगर इतना तो है कि सरकार ने बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि इस कानून को भी उतनी ही सख्ती से लागू किया जायेगा, जितनी सख्ती से धूम्रपान निषेध कानून को किया गया था। ..ओह ...यानि ..फ़िक्र को धुंए में उडाता चला गया या फ़िर फ़िक्र को अद्धे में डुबाता चला गया.......
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खबर :- गंगा में नहीं बहेगी गंदगी...

नज़र :- अरे ये चमत्कार कैसे जी। बरसों से चली आ रही परंपरा पर ये कैसा तुषारापात। अब गंगा में नहीं बहेगी तो और कहां..? लोगों ने रातोंरात प्रण ले लिया या...खुद गंदगी ने ही कह दिया कि ," अब तो मेरी पोस्टिंग कहीं और कराओ जी, मैं तो बोर हो गयी हूं...इस गंगा में बहते बहते.।" नहीं मैं फ़िर गलत समझा .....मतलब गंगा मे इतनी गंदगी जमा हो गयी है कि वो बहेगी ही नहीं...रुकी रहेगी। जब गंगा ही नहीं बहेगी तो गंदगी कैसे बहेगी......व्हाट एन आईडिया ....सर जी....

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खबर :- दूरंतो ट्रेन में भी सांसद ,विधायकों को यात्रा करने पर छूट...

नज़र :- मिलनी ही चाहिये, बेचारे ..गरीब, भूखे, नंगे । आखिर जनता के सेवक हैं । हमारा क्या है , हम तो जनता जनार्दन हैं। हमें छूट की दरकार नहीं। दुरंतो हो या टोरंटो, हर जगह हम पैसे खर्च करके जा सकते हैं । सेवक कहां कर पायेंगे इत्ता । इन्हें छूट दी जाये.।हुक्म की तामील हो...................
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खबर :- एयर होस्टेस से छेडछाड पर महिला आयोग सख्त

नज़र :- ऐसी घटिया हरकत पर भी सख्त न हो तो क्या करे......आखिर महिला आयोग है। अब देखना महिला आयोग दोषियों को पकड के कैसी सज़ा दिलवाता है ।उन्हें तो ऐसी सज़ा दिलवायेगा कि दूसरों के लिये सबक होगा ये। बलात्कारियों को तो महिला आयोग फ़ांसी पर चढा देता है...हां...। ...क्या कहा ऐसा कुछ नहीं है......मैं फ़िर से गलत समझ रहा हूं....तो....सख्त का मतलब ..उतना सख्त नहीं.....बस ये है कि महिला आयोग को इस तरह की हरकतें पसंद नहीं हैं......बस।
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खबर :- अदालत से राजनीति न करे यूपी सरकार

नज़र :- ये तो अन्याय है जी....सरासर अन्याय। कभी आप कहते हो इंजीनियरिंग को साइंस कहो सोशल (साइंस) नहीं । कभी कहते हो न पत्थर के हाथी बना सकते हो न बाबा साहब। और अब तो कह रहे हो राजनीति भी न करे सरकार। अबे क्या पागल समझा है...तो करे क्या...। समाज सेवा, दलित उत्थान, गरीबी उन्मूलन शिक्षा अभियान....जैसे आलतू-फ़ालतू के कामों से टाईम पास करे। बहन जी के राज में..ऐसा नहीं चलेगा...।
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खबर :- गंगा डौल्फ़िन बनी राष्ट्रीय जलीय प्राणी..

नज़र:- बन गयी न , चलो मुबारक हो जी ।अब न बनती तो कब बनती । कित्ती बच गयी हैं........थोडी सी । ओह तब तो ठीक किया ..वर्ना कहीं देर हो जाते तो.....? चलो अब हम प्रण लेते हैं कि इसका भी "उसी तरह " कल्याण-सम्मान करेंगे जैसा हम अपने अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों.....खेल, गान, ध्वज, नदी.....आदि का करते हैं । यहां .."उसी तरह" ..हमेशा ही ध्यान में रखें...सबसे महत्वपूर्ण तो यही है...
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बताईये ...अब कितना पढें....अब चाय पीकर आयेंगे न तब और भी पढेंगे .....कल जी ....