इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.

मंगलवार, 31 जुलाई 2012

बगावत कब रही है किसी कैमरे की मोहताज़






ये बारूद सुलगता रहा है बरसों से ,धधक उठा है शहर इसीलिए तो आज
ये तुम्हारी गलतफ़हमी है ,बगावत कब रही है किसी कैमरे की मोहताज़,
(हम खबर हैं तुम खबरनवीस हो , हम बीस हैं और तुम उन्नीस हो , समझे कि नाहीं)


जो अन्ना ने रखा है अनशन तो हमारा भी है रोज़ा बोले खुर्शीद जी सलमान,
का बात है , तनिक यही सब , जनता के बीच पहुंच कर बोलो न सीरीमान ,
(जनता अईसे समेटेगी तुम्हरी दुकान , सहलाते रहोगे गाल और कान)


ल्यो ये ससुरे हमें भविष्य की महाशक्ति बन जाने के सपने दिखाते रहे ,
सुना है पिछले दिनों , आधे देश के लोग घरों में मोमबत्ती जलाते रहे ,
(अबे अईसी खबर आई कि , पावर हाउस का किडनी फ़ेल हो गया बे ..)


बहुत गंभीर जो हुआ है पिराबलेम , तो फ़टाफ़ट अईसन फ़िर करे ये सरकार
फ़ौरन बोले सुनीता विलियम्स को कि ,अंतरिक्ष से एक ठो फ़ेंक दे रे तार ,
(फ़टाक से सटा के या लगा के नोक्सी , बिजली बहाल कर लो न यार )


फ़हरा उठा तिरंगा आज खेल समर में,और राष्ट्रगान से गूंज उठा लंदन ,
धमक उठी जो धायं धायं ,लगी निशाने पर गगन की चली रे ऐसी गन ,
(हो गया मनवा रे मगन , डोले फ़िरे फ़िरे प्रसन्न)


ये वो आग नहीं है सियासत वालों , जो सत्ता के गलियारों में लगती है ,
ये जलती है हमारे सीने में जब , तो हर सडक और दीवारों में लगती है,
(बेट्टा उखाड डालेगी तुम्हारी चूलें अबकि ,ये वो भीड नहीं जो बाज़ारों में लगती है ,)


सुना है वो खुश हैं कि उनकी मैय्यत पे कुछ लोग कम आए हैं ,
हा हा हा गफ़लत न पालो मियां , तुम्हें फ़ूंकने खुद हम आए हैं
(तब तक गिनते रहो उन्हीं उंगलियों पे , जिनसे तुमने सितम ढाए हैं)


कुछ लोग जो जनांदोलनों से ज्यादा मुद्दा उठाने वालों पर उंगली हैं उठाए,
वो जो जिन्हें तमाशा कह रहे हैं , दम हो तो ज़रा खुद कर के दिखाएं ,
(अजी और क्या उन्हें समझाएं ,जो बस बैठ के यूं ही बौखलाएं)


यूं तो बादल भोर से ही पूरे आसमान को काला किए ,उसे घेर के बैठे हैं ,
ये अलग बात है कि इंद्रप्रस्थ से खुद इंद्रदेव ही रुठे रूठे और ऐठें हैं ...


विदेश मंत्री एस एम कृष्णा : जिंदाल पर मांगेंगे पाक से जवाब ,
दो भाई जवाब दो , खिलाएं जिंदलवा को कौन सा बिरयानी और कवाब ,
(छी छी छी , अबे केतना साला कंडीसन हुआ खराब , करते रहो यही हिसाब किताब , अब तो चुल्लू भर पानी में डूब मरो जनाब)


कद्दू सोचते हो सोचने वालों , चिचिया रहे हो , अनशन में भीड बहुत है कम
मुटठी भर ही हो तो क्या , बस ये बता दो , क्या मुद्दे में नहीं है कोई दम ,
(जो है तो फ़िर बंद करो ये खटराग का सरगम)


अस्सी के दशक के आंकडे से सरकार खोज रही है काला धन ,
हा हा हा सरकारे खोज रही है , फ़िर तो घंटा मिलेगा टन टना टन ,
(जितना था सब धो पोंछ के कर दिहिस है पहिले ही डन डना डन)


जब से घोसित हो गए ,बाप उनके , माननीय जी एन डी तिवारी ,
अमां , सुने हैं कुल सवा सौ लोग भी कर रहे हैं दावे की तैयारी ,
(जल्दी ही एक ठो नया दल खडा करेंगे "टिवारी पुत्तर पालटी "..परचम लहरा जाएगा उनका)


कोर्ट : सुरेश कलमाडी कर देंगे लंदन में जाकर देश को शर्मिंदा ,
जे प्राब्लम देश की , अगले को क्या वो बेशर्म, है न कमाल का बंदा,
(हाय चोखो चोखो धंदा , अच्छा हो या गंदा :) :)


राष्ट्रपति : हमें भ्रष्टाचार ,आतंक और गरीबी को हर हाल में मिटाना होगा ,
अच्छा , फ़िर तो इसके लिए कम से कम 100 देश घूमने जाना होगा ,
(आखिर रिकार्ड बनते ही इसलिए हैं कि तोडे जाएं ..सबकी प्रतिभाएं अलग ना होती हैं जी :)


सतियानास हो बदरा तोहर , जब तब घिर घिर के आ जाते हो
जाओ बरसो जहां बरसते रहते , हमें काहे रोज मुंह चिढाते हो ,


पवार अडे , प्रधानमंत्री के भोज का साथियों सहित किया बहिष्कार ,
इहं साला बहिष्कार भोज का , अबे डिनर में क्या अमृत बंटा था यार ,
(ठूसम ठूस खाते ही होगे , उनका न सही किसी और का सही)


गृहमंत्री : जुंदाल की पक्की सुरक्षा व्यवस्था करे महाराष्ट्र सरकार ,
हां हां क्यों नहीं , आखिर महाराष्ट्र पर ही तो उन्होंने किया था न उपकार ,
(अबे थू है साला इस नंपुंसकता टाइप बिहेव करने वाला सिस्टम पर बे ...)


प्रतिभा पाटिल ने जाते जाते , चुनाव सुधारों पर जोर दिया ,
अबे वैसे क्या रायता फ़ैला था , ये क्या जाते जाते छोड दिया ....
(ऊ जईसे लोग सिलेमा का आखिरी सीन या आजकल गाना सुनाते हुए निकलता है न हॉल से ..ओइसे ही टाईप से ..जोर दिया गया है एकदम चना जोर गरम इश्टाईल में :)

प्रतिभा को दी गई आज , अश्रूपूर्ण भावभीनी विदाई ,
ये तो बता दो जाते जाते , चाची कित्ते देश घूम के आई ,
(कईयों ने आरटीआई भी लगाई , पर हाय आपने फ़िर भी बात छुपाई)


अफ़ज़ल की फ़ांसी के सवाल पर प्रणब अभी बिल्कुल रहे खामोश ,
इ का बोलेंगे ,जब ससुरे पूरे सिस्टम को सुंघा के ईथर किया हुआ है बेहोश ,
(बहुत गहरा है इसके पीछे का राज़ ,अभी बरसों बीत जाएंगे , काहे परेशान हो गए आज)


2 टिप्‍पणियां:

  1. व्यंग्य के माध्यम से अपनी बात कहना भी कला है , बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  2. इन बेशर्मो से एक बार भी मुह से नही निकला कि हमारी भी कोई गलती है। शांती भूषण ने एक शब्द भी गलत नही कहा था

    उत्तर देंहटाएं

हमने तो खबर ले ली ..अब आपने जो नज़र डाली है..उसकी भी तो खबर किजीये हमें...

Google+ Followers