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रविवार, 30 जून 2013

बात-बेबात की खबरें ............


खबरों में खबर की तलाश ...............


अगले एक महीने में केदारनाथ की यात्रा दोबारा शुरू हो जाएगी : कह रही राज्य सरकार ,
जो इस यात्रा से लौट कर वापस घर न पहुंचे ,पहले खत्म तो करिए उन आंखों का इंतज़ार
हुंह्ह्ह ! बात करते हैं
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घनघोर घोसना : एस एम एस से भारतीय रेलवे में आरक्षण सुविधा शुरू ,
अबे हप्प , एस एम एस से जब तक भेजने की योजना नहीं चालू , कुछ नहीं होगा गुरू ....
पर कॉल के हिसाब से बचवन आ रहा है न देश में , कपेसिटी त बहुत है न

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वाह कित्ती प्रजातांत्रिक खबर है , फ़िर से ए ए के अध्यक्ष बनना चाहते हैं कलमाडी ,
चाब्बास , जे होती है हिम्मत , अबे यूं ही नहीं करोडपति बन जाता ,कोई कबाडी ...
ममा अईसे नय न मानंगे
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सरकार ने चार धाम में मंदिरों के लिए कर दिया है 195 करोड रुपए का ऐलान ,
अच्छा किया हाकिम ,देवी देवता तो फ़िर तराश लेंगें ,कहां से लाओगे हमारे इंसान ,
हाय रे हाय नादान , हाय रे हाय भारत निर्माण
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सोना , डॉलर , पेट्रोल , मोदी , पप्पू , हाय अभी कुछ भी भेजे में जाने को नहीं है तैयार रे ,
जाने कितनी जोडी आंखों को तरस रही हैं कितनी जोडी आंखें , खतम नहीं हुआ इंतज़ार रे ,
हे ईश्वर .....तू उम्र भर का न यूं इतज़ार दे , या अब कर इस पार या करदे उस पार रे
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डॉलर के मुकाबले रुपैय्ये की गिर रही है , कीमत और सोना भी हुआ जाता है ढेर ,
कहां है बे इकोनोमिक्स वाले पप्पू पिरधान जी , इसपे हो जाए कोई गज़ल कोई शेर,
तेरी खामोशी , मेरी मदहोशी टाईप की फ़ीलींग वाली .......हायं
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बारिश ने रोके राहत कार्य के रास्ते ,
साधु भेष शैतान भी खडे , लूटने के वास्ते ........
इत आपदा/उत विपदा
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आपदा ,कहर बनके टूटी कयामत सी ,अमानवीयता ने इंसानियत को किया रे तार तार
वो ये कौन सी नस्ल है आदमियों की ,जिसने मरी हुई देहों संग भी कर दिया व्याभिचार........
छि: रे पिशाच , तेरी  हैवानगी पे धिक्कार ..थू है थू
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सनद रहे , और बराबर रहे कि , बेशक आज ये सच है, कोई इधर है तो कोई उधर है ,
जिन पे बीती ,कयामत सी बरपी ,वो भी थे हमारे ही जैसे ,हादसों में आज जिनकी खबर है
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अभी और होंगे खुलासे , अभी और देखना तुम तांडव और तमाशे ,
वो जो , सब देख के बै्ठे हैं , वे सोच के बैठे हैं ,कैसे कब कहां कितने बांटेंगे बताशे
मुआवज़ा .........
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देखिए जी अगर पिरधान जी इकोनोमिक्स वाले चुने हैं तो फ़िर तो उनका यही है कायदा,
पानी मिट्टी में टूटे डूबे हुए प्रजाजनों के दर्द का वो हवा में ही उडकर ले लेते हैं जायज़ा ,
कोई शक ????
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4 टिप्‍पणियां:

हमने तो खबर ले ली ..अब आपने जो नज़र डाली है..उसकी भी तो खबर किजीये हमें...

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