गुरुवार, 24 जून 2010

राष्टमंडल खेलों की तैयारी पूरी .........बस खेलने वाले खिलाडी नहीं मिल पा रहे हैं यार


खबर : राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी लगभग पूरी


नज़र :- वाह वाह ये हुई न बात । वैसे लगभग माने ..तनिक तफ़सील से पता लग जाता तो । अरे काम है महाराज । अब देख तो रहे हैं न , कि मेट्रो गुडगांव तक पहुंचा ही चुके हैं जल्दी ही बरेली और झुमरीतलैया तल भी पहुंच जायेगी । शहर की झुग्गियों में आग लगा लगा कर उसे पहले ही खत्म किया जा चुका है
। जो थोडी बहुत तैयारी अब करने को रह गई है , वो बस ये है कि , दस पंद्रह बार , पेट्रोल गैस की कीमत बढानी है .........अरे हां एक और काम रहा है । यार इन खेलों में भारत की तरफ़ से खेलने वाले खिलाडी नहीं मिल पाए हैं । चलो अभी तो टाईम है उन्हें ढूंढ ही लेंगे ..खेलों के आयोजन से पहले ।
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खबर :- फ़ांसी पर फ़ैसला जल्द


नज़र :- फ़ांसी पर फ़ैसला जल्द लिया जाएगा । आखिर किसी भी बात की हद है यार । अब तो बेचारे अफ़जल और अजमल भी थक चुके हैं । और सुना है कि कह रहे हैं अबे हमें भी तुमने अपने देश के घटिया मुजरिमों में ही हमारा नाम भी शामिल करवा दिया है । हमें नहीं रुकना और ज्यादा । ये बताओ फ़ांसी पर फ़ैसला करोगे ...अब इसके बाद इस फ़ैसले पर फ़ैसला कब लोगे । अरे लेते ही रहोगे तो दोगे कब .......फ़ांसी ।
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खबर :- नई उडान भरने को तैयार सचिन


नज़र :-अरे वाह ये तो बहुत ही बडी खबर है । खासकर ऐसे समय में जब फ़ुटबाल विश्व कप चल रहे हैं । जरूर तेंदुलकर ने मैसी को रिप्लेस करके अंर्जेटीना की टीम में खेलने का निर्णय किया है । क्या कहा नहीं ऐसा कुछ नहीं है । उडान भरने को तैयार .............उंम्म्म्म...फ़िर ..ओह अच्छा अच्छा ये तो और भी अच्छी बात है आज की तारीख में जब एयरलाईंस की हवाईजहाज उडान भरने को तैयार नहीं रहते , कमबख्त उडान मरने को तैयार रहते हैं ऐसे में सचिन उडान भर रहे हैं तो .......। अरे रे रे ..ये बात भी नहीं है , सचिन को भारतीय वायो सेना ने ग्रुप कैप्टन की मानद उपाधि देने का फ़ैसला लिया है । यार ये मानद उपाधि का चक्कर मेरे पल्ले आज तक नहीं पडा । चलो उडो उडो जी ।
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खबर :- ब्ल्यू लाईन बस ने ली दो की जान


नज़र :- वाह दिल्ली वालों को यूं तो नाज़ नहीं है ब्ल्यू लाईन बसों पर । लाख मैट्रो आ जाए , लाख नई नई कारें आ जाएं , रेडियो टैक्सी आ जाए । जो मारक क्षमता ब्ल्यू लाईन बसों की है ..और वो भी consistently .., हालांकि सरकार ने , पुलिस ने , खुद न्यायपालिका ने भी इसमें रोडे अटकाने की बहुत कोशिश की , वो performance , वो उपलब्धि किसी और की भी नहीं है । और सबसे मजे की बात है कि ब्ल्यू लाईन बसें इतनी बाधाओं के बावजूद अभी भी लगातार अपने स्कोर बोर्ड में बढोत्तरी करती जा रही है । और एक खासियत और भी है , ये कभी भी भेदभाव नहीं करतीं । कार में , सायकल में , स्कूटर में , या फ़िर कोई पैदल ही चला जा रहा हो ,,,इनकी मारक क्षमता से कोई बच नहीं सकता । सुना तो गया है कि इसे भारतीय सेना में भी शामिल करने की बात चल रही है ।


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खबर :जांच में एक दर्जन पुलिस टीम , नहीं लगा अब तक सुराग


नज़र :- अरे दर्जन के हिसाब से ये काम करोगे तो क्या खाक सुराग लगेगा, और फ़िर इतनी भी अक्ल नहीं है कि , आजकल केलों का सीजन थोडी है जो दर्जन का भाव लगा के पुलिस टीम तैयार की है । अरे भाई साहब , आजकल आम का मौसम चल रहा है , इसलिए मेरी मानिए तो तो किलो का पैमाना ही ठीक रहेगा । और फ़टाफ़ट चार पांच किलो पुलिस टीम को जांच में लगाईये , देखिए सुराग तो सुराग ....पूरा खजाना ही हाथ लग जाएगा । फ़िर किलो के भाव मिल भी जाएंगे ये आसानी से क्या कहते हैं ।

शुक्रवार, 7 मई 2010

मां ने बेटी का गला घोंटा .... देश में फ़ांसी देने के लिए अभी जल्लाद नहीं हैं ....



अभी हाल ही में एक साथ ये दोनों खबरें पढ लीं । पहली ये कि एक मां ने अपनी पत्रकार बेटी का गला घोंट कर मार डाला । मुझे लगा वाह इत्ती तरक्की मां ने भी कर ली , अब तक तो सुना था कि माएं अपनी कोख में ही बेटियों को मार रही हैं , मगर अब तो बाकायदा एक बालिग बेटी को ही फ़ंदा लगा कर उसका गला घोंट कर मार दिया उसकी मां ने । अब कौन कह सकता है भारत में नारी शक्ति कमज़ोर है । सुनो भाई ..किसी दूसरे को .दूसरों को मारना , और मरने के लिए छोड देना बहुत आसान होता है कोई भी कर सकता है , अब प्रियभांशु ने किया न अभी अभी , मगर किसी अपने को मारने के लिए बहुत बडा कलेजा होना चाहिए जी ..ओह हां बहुत बडी सी नाक भी होनी चाहिए , लो नाक नहीं होगी तो उसके कटने के डर से फ़िर आप अपनी बेटी का गला कैसे घोंट पाओगे ..छोडो यार ये कहां उलझ गया बेकार आगे पढते हैं ,,


देश में फ़ांसी देने के लिए अभी जल्लाद उपलब्ध नहीं हैं....। आयं ये क्या बात हुई भाई ..ये अचानक फ़ांसी की बात ...अबे क्या सीरीयसली ले लिया क्या किसी ने फ़ांसी की सजा को जो जल्लाद की ढूंढ शुरू हो गई । रिलैक्स यार ..जस्ट चिल्ल ....यहीं फ़ांसी वांसी तो मिलती ही रहती है ..देते थोडी हैं । ओहो नहीं समझे ..हमरे बिहार में जईसे थ्योरी और प्रैक्टिकल का पेपर होता है न थ्योरी हम देते हैं ..प्रैक्टिकल पेपर ..हम लोग प्रैक्टिकली देते नहीं हैं ...ओहोहो ..अबे कहां फ़ंस गया इस प्रैक्टिकल के चक्कर में । अरे यार आप तो बस ये समझो कि जब सरकार इत्ते पैसे खर्च करती है तो फ़िर उसका रिजल्ट इतना तो देना ही पडता है न । खैर , अच्छा कसाब के फ़ैसले पर जल्लाद की रिक्वायर्मेंट हुई है ।

अरे तो मिल नहीं रहा मतलब । अबे इस देश में जल्लाद की कौन कमी है बे । हर घर में , गली में , चौराहे पर , दफ़्तरों में और यहां तक संसद में भी किसिम किसिम के जल्लाद अवैलेबल हैं भाई । जैसा चाहिए डिमांड करिए मिल जाते हैं , और कोई जरूरी भी नहीं है कि आप डिमांड करिए तभी मिलते हैं वैसे भी मिल जाते हैं ।अच्छा अच्छा वो फ़ांसी वाला चाहिए , वो गले में फ़ंदा डाल कर टांगने वाला , तो ऐसे बोलो न ...वो जो हर साल अपनी बहूओं को वाया दहेज़ बहाना ..पंखों पर टांगते हैं वे चलेंगे क्या ? अच्छा ओनली फ़ौर मेल्स वाला कोई क्रायटेरिया तो नहीं फ़िक्स है न ?



यार क्या बहाने बाजी है ..आप डेट बताओ ..जल्लाद हम भेज देंगे , अपने फ़न्नु मियां कल अदालत की तारीख भुगतने आए थे तो कह रहे थे कि झाजी अब इस चोरी डकैती में प्रौफ़िट मार्जिन कम हो गया है जब से ये साले नेता भी इन सब में उतर गए हैं । हम सोच रहे हैं लोगों को मारने का काम शुरू किया जाए सुना है सरकार इन कामों को करने वालों पर भी करोडों खर्च कर रही है । तो कहिए कहूं क्या फ़न्नू मियां को ....आईये जल्लाद की जरूरत है ..औफ़िशियली ।

गुरुवार, 15 अप्रैल 2010

भारत ने कबड्डी विश्व कप जीता , IPL की चीयर गर्ल्स ने दावत दी


खबर :-भारत ने कबड्डी विश्व कप जीता

नज़र:-अच्छा अबे ये कब हो गया यार । बताओ भला विश्व कप जीत लाए और यहां रत्ती भर भी हलचल नहीं , कोई स्वागत सत्कार नहीं । जब पुरस्कार , सम्मान राशि की भी कोई बात नहीं है तो फ़िर उन्हें विज्ञापन कौन देने की सोचेगा । बताओ भला ये भी कोई खेल है , विश्व कप भी जीत लाए तो भी धेले भर की पूछ नहीं । अच्छा क्या कहा .....ऐसा नहीं है । उनका भी स्वागत करने की पूरी योजना बनाई गई है । IPL की एक चीयर गर्ल ने अपने एक दिन के मैच में मिली फ़ीस से ही पूरी टीम को शानदार जलसा दावत देने की सोची है । सुना है कि सभी चीयर गर्ल्स ने ये पेशकश की है कि वे अपने अपने गुल्लक को फ़ोड के उसमें से जो भी चिल्लर चुनमुच निकलेगा उसीसे , कबड्डी टीम के लिए घर बार, कार सबका इंतज़ाम करवा लेंगे । ये सब देखते हुए बहुत से कबड्डी खिलाडियों ने अगले साल IPL में चीयर गर्ल्स बनना ही बढिया औपश्न समझा है । ये भी ठीक है ...यार कबड्डी के विश्व कप जीतेने से तो अच्छा ही है
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खबर : सानिया शोएब की शादी संपन्न


नज़र :- नहीं ईईईईईईईईई........कह दो ये नहीं हो सकता । मेरा मतलब इत्ती जल्दी क्या जरूरत थी । अभी तो सप्ताह भर की एक्सक्लुसिव खबरें बनी पडी थीं । अभी तो इस रिश्ते से भारत पाकिस्तान के रिश्तों में शुरू होने वाले नए अध्याय पर जाने कितनी बडी राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय बहस होनी थी । सत्यानाश हो , मीडिया के इतने जी तोड प्रयासों के बावजूद , इतनी मेहनत के बावजूद भी , सानिया ने दुनिया की परवाह नहीं की । चटपट सब कुछ कर धर लिया । जे तो गल्त बात है जी एकदम गल्त है जे .......है कि नहीं
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खबर :- प्रधानमंत्री साधेंगे पाकिस्तान पर निशाना 


नज़र :- वाह इसे कहते हैं बोल्ड एंड ब्लोड ,प्रधानमंत्री । देखा मैं न कहता था कि प्रधानमंत्री सब कुछ पूछ कर नहीं करते कहते हैं । वैसे निशाना साधेंगे मतलब नहीं समझे ,कहीं कौमनवेल्थ गेम्स में तो हिस्सा नहीं लेने वाले हैं । नहीं नहीं उनका कहना है कि बिना पाकिस्तान की मंशा समझे वो कोई बात नहीं करेंगे । हें हें हें , अबे इसे ही कहते हैं क्या निशाना साधना । लो कल्लो बात ये निशाना तो आजादी के बाद से अब तक सारे ही नेता  मंत्री  साधते रहे हैं । खाली बंदूक ढन ढन । यार तुम मंत्री लोगों से अच्छा देश का सिर्फ़ एक संतरी है , उसने जिस दिन कह दिया न कि साधेंगे निशाना तो साध दिया उस
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खबर :-सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में घटिया दवाओं की आपूर्ति 


नज़र :- ये क्या खबर हुई यार ,मतलब, पब्लिक को काहे क्न्फ़्यूज़ किया जा रहा है भाई । या घटिया कह लो या सरकारी कहो  एक ही बात को दो बार अलग अलग कह के क्यों कंन्फ़यूज़ किया आयं । अब सरकारी स्वास्थ्य केंद्र होगा तो घटिया ही होगा और जब घटिया होगा तो दवाई मिल ही रही है ये बडी बात है , उसमें भी क्या ये बताना पडेगा कि घटिया है , पब्लिक भी बौरा गई है सचमुच ही बडा विश करने लगी है शाहरूख खान के कहने पर । सरकार का अपना ही स्वास्थ्य इतना खराब चल रहा है ऐसे में उसके स्वास्थ केंद्रों में क्या आपको फ़ोर्टिस और अपोलो वाली फ़ैसिलिटी चाहिए जी बताईए तो भला ॥
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खबर :- खाप पंचायतों को मिले लोक अदालत का दर्ज़ा 


नज़र :- हा हा हा ये खूब कही , अदालत जिन पंचों को उनके अभूतपूर्व फ़ैसलों के कारण फ़ांसी की सज़ा सुना रही है , उन्हें भी लोक अदालत का दर्ज़ा चाहिए । ओह अच्छा अच्छा इसलिए चाहिए होगी कि इसके बाद जो ये गोत्र मूल , प्रेम विवाह , जैसे गंभीर ...अति गंभीर , और सबसे जरूरी मुद्दों पर लंबित करोडों वादों के निपटारे के लिए ये खाप महापंचायतें ..ओह माफ़ी ..मेरा मतलब ये लोक अदालतें ..जल्दी से ..बल्कि एक ही दिन में निपटा सकें । मुकदमा तो मुकदमा वे तो सारा मामला ही एक दिन में सुलटा लेते हैं , सीधा दोनों युगलों को फ़ांसी पर टांगने का हुक्म दे कर । इतनी बढिया और त्वरित न्याय व्यवस्था के लिए तो इन्हें ये अधिकार मिलना ही चाहिए । पर पहले खुद बेचारे अपनी सज़ा से बच तो जाएं ॥
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मंगलवार, 23 मार्च 2010

आखिर हेडली पर माना अमेरिका : बस अमेरिका ही माना है हेडली माना कि नहीं भाई ?

खबर :- जनता पर भारी पडा शेरा ,टाईगर
नज़र :- लो कल्लो बात हमें तो पहले ही पता था कि ई बडकी बिल्ली को जो आप सब मिल के बचाने में लगे हो ..कह रहे हो कि ..खाली चौदह सौ बचे हैं ..उ एक एक भारी पडेगा । अब देखा न पड गया न  भारी शेरा को आगे करके राष्ट्रमंडल खेल के बहाने दिल्ली सरकार ने आम लोगों का तगडा शिकार कर डाला है ।अब पब्लिक ये सोच सोच के हलकान होती रहे कि यार मेरे घर के सिलेंडर में से सरकार इत्ता बडा राष्ट्रमंडल खेल करवाने के मूड में है । जाने कल को ओलंपिक का मन हो गया तो ..पता नहीं क्या क्या बिकवा के छोडे । अच्छी मुसीबत है यार ...शेरा भी बच गया सरकार भी ...बिल्ली के चक्कर में मारी गई दिल्ली ॥
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खबर :- आखिर हेडली पर माना अमेरिका
नज़र :- मान गया न , देखा हमने नहीं कहा था कि अमेरिका भी बडा मानू टाईप का है ..पहले छिछोरों की तरह न न करता है फ़िर आखिर में मान ही जाता है । चलो मुबारक हो समझो केस तो हल ही हो गया , बस एक बार हेडली भी मान जाए तो क्या कहने । क्या कहा ..हेडली माने या न माने क्या फ़र्क पडता है ।
और फ़िर अमेरिका भी फ़ट से इसलिए भी मान गया होगा क्योंकि उसने देखा होगा ही कि जब पाकिस्तान से आए अपने पडोस के मेहमान अजमल , और अफ़जल को हम कित्ता प्यार से रख रहे हैं तो फ़िर तो हेडली के पास तो अमेरिकन वीज़ा पावर है । ..है कि नहीं ??
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खबर :- दिल्ली बजट :खेल के लिए है सारा खेल
नज़र :- यार ये तो जुलम पे जुलम है , सरकार । ऊ भी अईसन कि आम पब्लिक तो आम से तरबूज़ हुई जाती है । अभी कल ही पढा कि दुई ठो किरकिट टीम को जाने कितने करोड अरब खबर रुपए दे कर खरीदा गया है बाकायदा बोली शोली लगा के । फ़िर आज देखा तो सरकार कह रही है कि देखो जी , हमें इस साल एक मंडल खेल कराना है इसलिए तुम्हारी रसोई का कमंडल ठंडा किए देते हैं । आज से सिलेंडर का साईज़ उतना ही रहेगा तनिक दिल बडा कर लीजीए ...अरे बिल बडा न होने वाला है व्हाट एन आईडिया सर जी । मगर यार जब इत्ते ही गरीब हो रिए थे तो कह देते आईपीएल वालों को पैसा उधार देने को ..आराम से ओलंपिक भी करवा सकते थे भईये ।
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खबर :- भाजपा न संघ को छोडेगी न हिंदुत्व को
नज़र :- बिल्कुल छोडना भी नहीं चाहिए , खासकर ऐसे में जब न कुछ छोडने के लिए बचा हो न ही पकडने के लिए ...और अब तो सुना है कि आम आदमी को भी भाजपा की इस पकडम पकडाई में अब कोई इंट्रेरेस्ट रह ही नहीं गया है । फ़िर इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है कि ..हम तो डूबेंगे सनम ....और सब जने साथ साथ ही डूबेंगे । वैसे एक बात समझ में नहीं आई ..भाजपा ने हिंदुत्व को कब पकडा था । हां मोदी शोदी जैसे एकआध को छोड दिया जाए तो , बांकी सबने तो कर लिए सारे वादे पूरे । धारा 370 हटा दी , राम मंदिर बना दिया ..और ..अबे छोडो हमने कौन तुम्हारी रिपोर्टकार्ड लिखनी है ।
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खबर  :- अर्थव्यवस्था की नब्ज़ टटोलेंगे प्रधानमंत्री
नज़र :- ओह आखिरकार प्रधानमंत्री के भीतर छुपा अर्थशास्त्री जाग ही उठा न । हमें तो पता ही था कि एक न एक दिन ऐसा होगा ..जब प्रधानमंत्री को इस कोमा में जा रही अर्थव्यवस्था का ध्यान आ ही जाएगा ,,बेशक चीनी , आलू खरीद कर बेहोश होती आम प्रजा का ध्यान आए न आए । मगर सर जी जल्दी करिए न ....मुझे तो लगता है नाडी  रही नहीं है अब ..बस धुचुक धुचुक ही हो रहा है सब कुछ ..अरे वो मरने से पहले फ़डफ़डाने टाईप का होता है न ..वैसा ही कुछ चल रिया है भाई । देखें अब नब्ज़ पकड के कब तक सरकार अर्थ्वयवस्था का कब्ज़ दूर कर पाती है ।

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खबर :- बातचीत से पहले पाक का दामन देखे अमरीका : भारत की नसीहत
नज़र :- भारत की नसीहत , अमेरिका को ..वो भी ये कि पाकिस्तान का दामन देखे । अबे कितना जुलुम डायलाग काट लिए आज भैय्या । तबियत उबियत तो ठीक है न सबकी । ई अचानक अईसन बंदर पलटी कैसे भाई । ई जरूर थरूर ही होंगे । का कहे नहीं ई तो एस एम कृष्णा हैं...कह रहे हैं कि अमेरिका को पाकिस्तान का दामन देखना चाहिए  इससे पहले कि वो पाक से परमाणु मुद्दे पर बात करे । लो तो इसमें कौन नई बात है जी , पाकिस्तान का दामन तो अमेरिका देखता ही रहता है ..अरे अपना डोनेशन का बैलेंस चैक करने के लिए यार । और फ़िर पाकिस्तान के मियां अब्दुल कादिर ने ही तो इससे पहले अमेरिकी परमाणु की इत्ती बढिया सेल की थी ..फ़िर क्या देखना जी ॥

शनिवार, 13 मार्च 2010

सरकार गरीबों की किडनी के लिए चिंतित : अद्धा , पव्वा और पाऊच वाली दारू भी हर्बल हो

खबर :गरीबों की किडनी रोग पर चिंतित है सरकार
नज़र :-बताईये फ़िर भी लोग कह रहे हैं कि सरकार कुछ नहीं कर रही है गरीबों के लिए , महंगाई के लिए कुछ सोच नहीं रही है । जबकि गरीबों के लिए तो कुछ भी सोचना ही आज के समय में सबसे बडे साहस का काम है , बेशक गरीब के पेट के लिए न सही मगर किडनी यानि गुर्दे के लिए , वो भी गरीब के गुर्दे के लिए सोचना कोई कम बडी उपलब्धि तो कतई नहीं मानी जा सकती , और फ़िर हो भी क्यों न आखिर गरीबों की गुर्दे के  कारोबार का टर्नओवर भी कुछ कम बडा नहीं है । खैर ,मगर सरकार ने पूरा तय किया है गरीबों की किडनी खराब होने से बचाने का एक ही उपाय है कि उन्हें जो अद्धा , पव्वा उपलब्ध है वो गुड क्वैलिटि का नहीं होता है । इसलिए सोचा जा रहा है चीनी के धंधे से जो मुनाफ़ा हो रहा है , उसका थोडा सा हिस्सा पव्वे अद्धे के कल्याण के लिए लगाया जाएगा । और गरीब को पाउच में भी बढिया स्वाद वाला हर्बल टाईप का दारू उपलब्ध कराया जा सकेगा ...जय हो जय हो ॥
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खबर : पेट्रो कीमतें कम न होंगी :वित्त मंत्री
नज़र :- नहीं होंगी जी , बिल्कुल भी नहीं होंगी । और आपके फ़रिश्ते भी चाहें न तो भी नहीं कम होंगी , अबे भाई ये बताओ जब तुम लोग पाव भर चीनी और किलो टमाटर का भाव नहीं कम करवा सकते , जो कि अपने ही देश में उपजते हैं तो ये पेट्रो तो फ़िर भी सऊदी से मांग मूंग कर लाते हो ..उसकी कीमत कहां से कम कर लोगे भैय्या ?? लेकिन यार एक बात समझ में नहीं आई ये कौन सी ऐसी स्टेटमेंट थी जो आपने मुंह फ़ाड कर मीडिया को बताया कि जिस पर गर्व किया जा सके । अबे ये तो नहीं भी बताओगे तो सबको पहले से ही पता है । ..अच्छा अच्छा और कुछ था नहीं आज बोलने छपने के लिए ....फ़िर तो ठीक है ॥
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खबर :- अब फ़र्जी वीजा स्टिकर के धंधे में भी आईएस आई

नज़र :- ओह ये मंदी जो न करवाए , अच्छा भला बम बारूद का धंधा चल रहा था । अमरीका से पहले बम बारूद मिलता था , फ़िर उसके फ़ूटने पर आतंकियों की तरफ़ से भी ईनाम शिनाम ....यानि डबल बेनिफ़िट । मगर अब उस धंधे में भी वो बात नहीं रही । कारगिल के बाद से तो घुसपैठ आदि का पार्ट टाईम काम भी जैसे सुस्त पड गया है । और ऊपर से मंदी की मार । अब नकली नोट के काम से पूरे देश का पेट तो नहीं भर सकता न तो ऐसे में यदि कोई अपनी बिजनेस पोलिसी के हिसाब से धंधे में कुछ नई कोशिश कर रहा है तो ये खबर बन गई । बताओ यार शराफ़त को जमाना ही नहीं रहा ....अगला कुछ तो करेगा ही न । अब ये मत सलाह देने लगियेगा कि ..विकास का , उद्दोग का , और ऐसे ही फ़ालतू कामों में अपनी बरसों की बनाई इमेज खराब कर ले ।
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खबर :चीन ने गूगल को चेताया

नज़र :- यार अब इसमें चीन की बहादुरी को सलाम करना है कि गूगल बाबा के खराब चल रहे टाईम को । आजकल गूगल बाबा वैसे भी बहुते गुगली का शिकार हो रहे हैं । हम तो खुदे सोच रहे हैं कि चेताएं उनको कि ...का बाबा कब तक ..ई हिंदी ब्लोग्गर्स का एड सेंस को सस्पेंस में रखोगे ...सबको टेंस में रखे हुए हो । अरे खोलो जी सबके लिए नयका अकाऊंट सब । ओईसे सुने हैं कि चीन कहा है कि गूगल बाबा का हैकिंग बर्दाश्त नहीं करेगा ...लो चोर मचाए शोर । जो ससुर चीनी सब ..भारत का पूरा क पूरा क्षेत्र को हैक करके बैठा हो ..ऊ भी अईसन बात कहता फ़िर रहा है । का किया जाए ...ई आजकल बाबा लोग का टाईमे खराब चल रहा है शायद ।
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खबर :-जल्द भारतीय को चांद पर ले जाएगा रुसी यान

नज़र :- काहे जी रूसी यान काहे जी हम तो सुने थे कि भारत अपना खुद का ही एक ठो उडन खटोला चांद पर भेजने का तैयारी कर रहा है ..उसीमें । का आप लोग यी पार्टनरशिप पर ई धंधा शुरू किए हैं का जी ? अरे ई मंदी जो न कराए जी । क्या कहे ..ड्राईवर का वेकेन्सी के लिए सबसे बढिया भारतीय ही मिला है । भारत का ड्राईवर ..सायकिल मोटरसायकिल, टरेन , टरक , जहाज और हवाईजहाज सबको एके स्टाईल में चला सकता है , मजाल है कि एक मिनट भी खतरे का मजा न आए । ..ओह तो ई क्वालिफ़िकेशन देख के ...ठीक है ....हम तो कहते हैं कि दिल्ली में चलने वाले  ब्लू लाईन बस का ड्राईवर ले जाईये ...गजब का परफ़ोर्मेंस के साथ साथ ..मारक क्षमता भी कमाल का है उनका तो ...राईट लेफ़्ट ....दोनों तरफ़ का शिकार कर लेते हैं ऊ लोग ॥
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खबर :-गांव देहात में भी दिखेंगे एटीम

नज़र :- जे बात , आज तो हर तरफ़ विकास ही विकास दिख रहा है , ओहो आप लोग भी न मेरा मतलब दिन में तो दिख ही रहा है न , अब रात में बिजली नहीं रहती ,,का कहे खंबा भी नहीं है ...तो उससे का ...अरे एटीएम के विकास से बिजली का का कनेक्शन ? आज घर घर में मोबाईल है , टीवी है , डिश है , और अब एटीम भी होईये जाएगा । और कितना फ़ैसिलिटी चाहिए जी । .....अरे जाईये जाईये ..आप लोग तो बस जब देखो ..स्कूल , अस्पताल , उद्दोग धंधा , का रोना ले कर बैठ जाते हैं ...उससे ऊपर उठिए जी और थिंग बिग .......है कि नहीं ?????
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तो इसी के साथ आज के बुलेटिन समाप्त हुए ...मिलते हैं एक छोटे मोटे कौमर्शियल ब्रेक के बाद ....

मंगलवार, 16 फ़रवरी 2010

पाकिस्तान से जुड रहे पुणे विस्फ़ोट के तार ...नहींssssss !!! कह दो ये झूठ है ....



खबर :- पाकिस्तान से जुड रहे पुणे विस्फ़ोट के तार .......

नज़र :- नहींssssss !!! कह दो ये झूठ है । सरारस सफ़ेद झूठ । ऐसा कैसे हो सकता है , पाकिस्तना ऐसा कैसे कर सकता है ...पाकिस्तान तो हमारा पडोसी देश है , हमारा छोटा भाई है । उनके खिलाडियों , कलाकारों , फ़नकारों के तार बेशक हमसे जुडे हो सकते हैं , । हालांकि इस बार खिलाडियों के मामले में जरूर थोडा सा कनेक्शन आऊट और रेंज़ हो गया था , मगर इसके लिए तो हमारे बादशाह खान ने सरेआम अपनी परेशानी और चिंता जाहिर भी कर दी है । मेरी तरह एक आम आदमी यही सोच के परेशान है कि ...पाकिस्तान के तार विस्फ़ोट से .....पाकिस्तान जैसे शांतिप्रिय, सहनशील, सहिष्णु ..(और भी जितने विशेषण हैं जोड लें , ) देश के तार कैसे जुड सकते हैं । क्या कहा .....ये कौन सी नई बात है ये तो हमेशा की कहानी है, अमां जब ये हर बार की कहानी तो फ़िर क्यों बार बार यही राग अलापते हो यार ? कभी तो किसी बरमूडा, होनोलुलू , टिम्बकटु का नाम लो, उनसे तार जोडो न ।

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खबर :-चार वर्ष से पहले बच्चों पर न पडे पढाई का बोझ : कपिल सिब्बल

नज़र :- अमां क्या के रिये हो भाई मियां ,? चार साल से पहले बच्चों पर पढाई का बोझ । राम राम राम कैसा जमाना आ गया है यार , हमारे जमाने में तो पांच साल के बाद भी जब स्कूल जाना शुरू किया था तो जाते समय आर्केस्ट्रा की वो धुन बजाया करते थे कि पूरे मुहल्ले को पता चल जाता था कि छोटे झाजी स्कूल चले हैं । और आप बच्चों पर पढाई का बोझ की बातें कर रहे हो । हम तो कहते हैं कि बच्चे अपने बस्ते का बोझ उठा के इतने मजबूत हो जाते हैं कि आप चाहो तो उनसे ईंट पत्थर की ढुलाई करवा लो । बच्चों का तो पता नहीं , और पता क्या नहीं ये उनके बस्तों के वजन , जो खुद उन बच्चों से शायद थोडा ही कम ज्यादा होता हो , से पता चल जाता है । मगर फ़ीस और डोनेशन का जो गज़ब का वजन इन दिनों अभिभावकों पर पड रहा है ,उसने तो उनकी कमर ही तोड कर रख दी है । तभी तो आजकल कोई माता पिता अपनी पीठ पर बच्चों को बैठा कर हाथी घोडे की सैर नहीं कराता । बोझ कम करने के लिए कुछ तो किया ही जाए अब

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खबर :- भारत ने बनाई मैच पर पकड , सचिन सहवाग की धमाकेदार पारी

नज़र :- उफ़्फ़ !!! क्या मुसीबत है ? यार इन खिलाडियों को कोई समझाता क्यों नहीं ? यदि अच्छे फ़ार्म की स्टेबिलिटि नहीं बनाए रख सकते तो कम से कम खराब फ़ार्म वाली फ़ार्म तो बनाए रखनी चाहिए कुछ दिन । अभी दो दिन पहले ही तो मीडिया बंधुओं ने इतनी मेहनत से सबकी कुंडली बनाई थी , टोकरे भर भर के एक्सक्लुसिव रपटें बनाई थी , कि देखो हमारे ये महान खिलाडी कितना गंदा खेल रहे हैं , अपना तो अपना, हमारे जैसे सेंटी दर्शकों की भावनाओं के साथ खिलवाड करते हुए उनका भी अपमान कर रहे हैं । इन्हें कोई हक नहीं कि इतना सम्मान, नाम दाम मिले । इनकी इतनी घटिया परफ़ार्मेंस को देखते हुए क्रिकेट को भी जल्द ही राष्ट्रीय खेल घोषित कर देना चाहिए , जब हाकी जैसा हाल होगा न इनका तो पता चलेगा कि कैसा लगता है ? सारी विज्ञापन कंपंनियां भी सोचने लगी थीं कि , चलो यार , छोडो इनको , सानिया सगाई टूटने के बाद फ़्री है , उसीसे कुछ विज्ञापन करवाते हैं ।............मगर हाय रे फ़ूटी किस्मत , अब ये इस मैच में फ़िर खेलने लगे ....अब फ़िर से वही सब करना पडेगा .....माद्दा वाले खिलाडी हैं , जुझारू टीम है .....आदि आदि .....कित्ती टेंशन है भाई इस क्रिकेट में । अपना राष्ट्रीय खेल ही ठीक है ....और अबके तो सुना है सब कह रहे हैं फ़िर से दिल दो हाकी को ..पता नहीं वेल्नटाईन पर किसी ने दिया कि नहीं

रविवार, 17 जनवरी 2010

लो ब्लोग्गर तो टंकी पर चढे ही , अब ये भी .!!!!!



खबर:- भावनाओं में बह कर निशानेबाजी छोडने का फ़ैसला नहीं लेंगे अभिनव बिंद्रा

नज़र :- और ल्यो. ....इहां लोगबाग ई सोच के हलकान (यार इस हलकान शब्द का बडा ही ऐतिहासिक टाईप का महत्व हो गया है हिंदी ब्लोग्गिंग में )हुए जा रहे हैं कि हम ब्लोग्गर बात/बेबात टंकी पे चढ जाते हैं , फ़िर सबके घुडकने से टंकी से उतर आते हैं ।इहां तो ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट निशानेबाज खुदे सबके निशाने पर चढने के बाद टंकी पर चढ के एलान कर दिए कि जाओ , अब नहीं लगाएंगे हम निशाना , तुमही लोग लगाओ , और मच गया हडकंप । अब उनकी ऐसोसियशन ,( अजी अपने जैसा प्रेम थोडी है कि टीप और पोस्ट लिख लिख के उसकी सीढी बना के ब्लोग्गर को टंकी से उतारा जाता है , )भागती फ़िर रही है कि कौन सी लिफ़्ट लगाई जाए कि अभिनव बिंद्रा नीचे उतर आएं । वैसे सुना है कि इसके बाद अभिनव बिंद्रा ने भी कह दिया है कि वे भावनाओं में नहीं बहेंगे ।

एक हम हैं बहना बहाना तो पता नहीं सीधा जंप मार के डूबिये जाते हैं । देखा हमें किसी ने कहा था , तुम्हें गोल्ड मेडल नहीं मिला तो क्या काम तुम्हरा भी उससे कम नहीं है .....अरे परफ़ोर्मेंस का नहीं यार टंकी पे चढने का भाई
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खबर :- यदि अब हुआ आतंकी हमला तो मुंह तोड जवाब देगा भारत :अमरीका ने कहा

नज़र :- अबकि सैम चचा बोले हैं ......वाह ई तो एक दम ईमोशनल अत्याचार टाईप हो गया जी । आखिर ऐसा एंगल चेंज कैसे हुआ जी ? एक तो यार यदि अबकि बार .....यदि अबकि बार ...बार बार ये डायलाग मत मारा करो , तुम लोग तो कुछ करते धरते नहीं हो । आतंकवादी इसे सीरयसली ले लेते हैं और फ़िर कुछ कर देते हैं कि लो अबकी बार भी कर दिया ..कर लो जो करना है । वैसे अबकि बार भारत मुंहतोड जवाब देगा ...ई का ...का मतलल है भाई । कौनो स्पेशल हथौडा दिए हो का गिफ़्ट में ओबामा जी ??? फ़िर आपको कैसे पता कि मुंह तोड ही देगा भारत । देखिए हमारी परंपरा तो आतंकवादियों के मुंह की चुम्मी लेने की रही है , हम आपकी तरह अशिष्ट लोग नहीं हैं कि बदला ले लें ..समझे कि नहीं ..सैमू चचा ॥
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खबर :- प्रधानमंत्री जल्द ही सुनेंगे राज्य के मुख्यमंत्रियों के गिले शिकवे

नज़र :- राम राम राम ! का जमाना आ गया है भाई , बताईये भला कहने को हम लोग प्रजातंत्र हैं और खबर देखिए , प्रधानमंत्री सुनेंगे गिला शिकवा......किसका ....मुख्यंत्री लोग का । अबे कभी जनता का भी नंबर आएगा ....। तुम प्रधानंत्री , मुख्यमंत्री , मेन मंत्री ,साईड मंत्री लोग ही आपस में एक दूसरे के गिले शिकवे कहते सुनते रहोगे तो काहे के लिए कहते फ़िरते हो प्रजातंत्र ...इसे नेता तंत्र क्यों नहीं कहते ? और क्या कह रहे हो , तुम्हारे गिले शिकवे ....अबे अभी भी गिले शिकवे । अबे और कित्ती फ़ैसिलिटी चाहिए तुम्हें , इत्ते नवाबी ठाट बाट , जितने मर्ज़ी अपराध करो , सात खून भी माफ़ , सारे खानदान को नौकरी चाकरी , और अपने अपने हिसाब से घोटाले घपले करने की फ़ैसिलिटि अलग से .तब भी तुम्हारे गिले शिकवे खत्म नहीं हो रहे हैं । सुनिए जी मनमोहिए इन्हीं का आप ...हम तो प्रजा तंत्र हैं जी चलेगा ॥
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खबर :- सहवाग ने बांग्लादेश को साधारण टेस्ट टीम बताया

नज़र :- टेस्ट टीम ....वो क्या होती है जी । हें हें हें अच्छा अच्छा आप वो त्रेता द्वापर युग के क्रिकेट की सहवाग ने ऐसा कहा , ये सहवाग को हमेशा से सच एकदम खुल्लमखुल्ला कहने की बीमारी रही है यार । वैसे इसमें इतना हाय तौबा मचाने वाली कौन सी बात है भाई , जिस अंदाज़ में सहवाग बल्लेबाजी करते हैं उस अंदाज में तो आस्ट्रेलिया भी साधारण टेस्ट टीम लगती है तो बांग्लादेश तो बांग्लादेश है । वैसे भी इतनी बार बार लगातार हारते जाने के हिसाब से तो वो हमें साधारण टीम नहीं लगती एक दम असाधारण टाईप परफ़ोर्मेंस है जी

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खबर :- आस्ट्रेलिया में नहीं थम रहे हमले

नज़र :- अच्छा , बताओ यार तुम लोग तो राज ठाकरे से भी गए गुजरे हो यार । अब तो सुना है कि वो भी तब तक बिहारियों पर हमले नहीं करेगा जब तक चुनाव न सामने हों । अबे उसे तो फ़िर भी पोलटिस करनी है भाई , मगर तुम कंगारू लोग काहे के लिए एतना बावले हो गये हो भाई । एक हमारी सरकार है ससुरी , कौनो क्रिकेटर के साथ कुछ हो जाए , कि खाली ऊ को कोई कुछ बोल भी दे तो पगलाए जाती है, मुदा अपने देश का बचवा सबके साथ ई सब हो रहा तो नामर्दी दिखा रही है । अरे एक ठो आस्ट्रेलियन को अपने इहां भी घसीटो-पीटो , सब अपने आपे ठीक हो जाएगा ।नहीं त भारत कैसे ई सब मामले में बहादुरी दिखाता है ई बात कौनो आस्ट्रेलिया से छुपी थोडे है .......
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खबर :- शाहदरा (दिल्ली) में सरेशाम १७ लाख की लूट

नज़र :- लो तो ई में खबर वाली कौन बात है । ई कि दिल्ली में लूट हुई, सत्रह लाख की हुई आ कि सरेशाम हुई ई । ई में से कौन बात अनोखी लगी जी , कि खबर बना दिए । अरे आज दिल्ली किसी बात में कम थोडे ही है जो लूट जैसी छोटी मोटी वारदातों के लिए रात का इंतज़ार करना पडे । वो भी कितनी रकम के लिए सिर्फ़ सत्रह लाख , अबे इत्ते में आजकल घर भी नहीं मिल रहा । सोचो ये तो है नहीं कि बेचारे लुटेरों ने अपना जीवन संवारने के लिए या फ़िल्मों टाईप कि इसके बाद लूट के पैसों से सारा जीवन अच्छा बन के गुजारेंगे , की भावना से किया होगा । वो तो यार शाम की बातो होगी , ठंड इतनी ज्यादा पड रही है तो जरूर उन्होंने दारू-मुर्गा, पार्टी शार्टी के लिए , बेचारों ने इतनी मेहनत की होगी । अब महंगाई को देखते हुए शाम की पार्टी के लिए इत्ती रकम तो जेनुइन है यार .....छोडो छोडो फ़ालतू की खबर को तूल दे दिया है


चलिए आज के समाचार समाप्त हुए