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सोमवार, 12 अक्टूबर 2009

आतंकी पाक सेना के मुख्यालय में घुसे...कुछ नहीं जी अपनी तन्ख्वाह लेने गये होंगे

खबर:- आतंकी पाक सेना के मुख्यालय में घुसे...

नज़र :- लो तो भैया अब आदमी अपनी तन्ख्वाह के लिये अपने औफ़िस में नहीं घुसेगा तो कहां जायेगा....और फ़िर सामने दिवाली है तो जाहिर है कि बोनसवा वैगेरह भी होगा...सुने तो हैं कि ई जौन अमरीका से सारा डोनेशन मिला था ई बार ..ऊ सब का सब कसाब के ओकील साहब को फ़ीस देने में खतम हो गया जी..काहे से सुने हैं कि भारत सरकार नहीं न दे रही है उनको कौनो फ़ीस ईहे बात से अधीर होकर बकिया लोग बोला कि भैया अपना अपना तन्खवाह तो लईये लो..
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खबर :- देश में है पर्याप्त खाद्य भंडार : प्रणब मुखर्जी ..

नज़र :- ओह शुक्र है ..चलिये इसका मतलब ये है कि अब कम से कम इतना तो तय है कि इस दिवाली पर आप लोग सबको दाल चावल का पैकेट ..उपहार में दे सकते हैं...क्या क्या कहा..प्रणव खाने की बात कर रहे हैं..अरे पगला गये हैं का...अब खाने में दाल चावल जैसे खाद्य पदार्थों का उपयोग कौन कर रहा है ..खाने के लिये बर्गर, चाऊमीन, पिज्जा, वैगेरह है न..क्या कह रहे हैं ...किसानों को क्या पता इन सबके के बारे में ..अरे तो उनको कौन पता है अब दाल चावल के बारे में..वैसे भी इस जय हो सरकार में किसान ..खाने पीने की चिंता से मुक्त हो चुके हैं..इसीलिये आत्महत्या कर रहे हैं..उनके लिये क्या खाना और पीना..
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खबर :-१०३ करोड के विमान में उडेंगे गुलाबचंद

नज़र:- लो अब ये भी खबर हो गयी क्या..अबे जब इत्ते का विमान होगा तो जाहिर सी बात है कि उडेंगे ही..तैरेंगे थोडी...अमां खबर तो तब होती ....यदि गुलाब चंद ..बच्चों द्वारा बनाये गये कागज के हवाई जहाज में उड के दिखाते । तब हम मानते कि गुलाब चंद वाकई कुछ हैं।

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खबर:-महिला शिक्षकों को मिलेगी मनचाही जगह पर तैनाती

नज़र :- मनचाही मतलब....कह तो ऐसे रहे हो जैसे ..ऊ अमरीका कहेंगी तो अमरीका में तैनात कर दोगे का...अरे नहीं भाई ई पूछने का कौनो खास मकसद नहीं था ..ऐक्चुअली सुने हैं ..वहां रहने पर आपको नोबेल पुरस्कार मिलने का चांस ..समझिये कि निन्यावे प्रतिशत तो बढ ही जाता है..सुन रही हैं न मास्टरनी जी..अरे वही मास्टरनी नामा वाली..तो मान के चले न ..कि अगला नोबेल आपही को मिलने वाला है .....मुबारक हो जी..

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खबर :- तिहाड में पंद्रह वर्षों में ३२६ कैदी मरे ..

नज़र :- वाह जी दिल्ली पुलिस सदैव आपके लिये आपके साथ..तिहाड जेल में भी...अपना काम बखूबी करती है...फ़िर भी जाने लोगो को क्या हो जाता है जब देखो आरोप लगाती रहती है पुलिस पर...ठीक है कि उनकी स्पीड थोडी कम है जेल में...मगर इससे उनकी कार्यप्रणाली पर अविश्वास का कोई कारण नहीं बनता जी...ये तो वैसे ही है जी जैसे आपका लैपटौप पर और पी सी पर स्पीड में थोडा बहुत फ़र्क तो पड ही जाता है। वैसे हमें उम्मीद है कि दिल्ली पुलिस जल्दी ही अपनी इस खराब आंकडे को दुरुस्त करके कोई न कोई नया रिकार्ड बनाएगी..

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खबर :- तीस फ़ीट की दूरी से भी कंप्यूटर को इशारों पर नचाएगा माउस

नजर:- अमा ये माउस न हुआ गोया ..श्रीमती जी हो गया.कंप्यूटर का..जो इतनी दूर से नचा देगा.....चलिये अच्छा है कंप्यूटर नाचेगा तो हमारी पोस्ट भी नाचेगी...मगर एक दिक्कत है जी...ये तीस फ़ीट से नचाने के लिये तो हमें पता नहीं कित्ते पडोस में जाकर कंप्यूटर चलाना होगा जी...ओह ये अविष्कार ..विदेशी लोगों को ध्यान में रख कर किया गया है ..ऊ लोगन तो लगभग सब कामे पडोसी के घर से कर लेता है न...बताईये भला ई में हम लोग के लिये का खबर था
_______________________________________________________________________खबर:- अब मैं आराम करना चाहती हूं, : लारा दत्ता

नज़र :- बताईये भला लोगों को काम काज के बिना भी आराम करने का कितन मन करता है ...अरे दत्ता जी ..पहले तनिक काम तो कर ही लेते....फ़िर तो आरामे आराम है न जी...ओईसे भी आप लोगन को ...कामे कितना मिलता है जी...जादे तो आरामे है न...तो काहे के लिये इतना स्पेशल रूप में बोले हैं जी ..कौनो स्पेशल टाईप का आराम का बात है का..तब तो करबे किजीये जी ..

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शनिवार, 10 अक्टूबर 2009

गले से नहीं उतर रहा ,ओबामा को नोबेल,...अजी गला खराब है आपका, विक्स की गोली लो और खिचखिच ....


खबर :- गले से नहीं उतर रहा, ओबामा को नोबेल......

नज़र : मतलब साफ़ है....आपका गला खराब हो गया है॥हो सकता है उसमें...मुर्गी या शूकर फ़्लू का प्रकोप हो गया हो....आपके लिये वही दैवीय बूटी ही काम आ सकती है॥विक्स की गोली लो...खिचखिच दूर करो.........और नहीं हो रही न तो भी खिटपिट मत करो यार...बताओ किसके गले नहीं उतर रही॥

॥अरे हमरे गले नहीं उतर रही है॥बोलो का करोगे , बताओ भला ....हम तो सोच रहा हूं कि ई नोबेल के नाती पोता पर केस कर दूं...अरे आज के डेट में इस पुरस्कार के लिये हमसे बेहतर दूसरा कौनो हो सकता है दूसरा...देखो हम इलेक्शन हार गये ...मंत्री बनने से भी रह गये...हमरा सबसे फ़ेवरेट मंत्रालय भी जानबूझ कर ..उनको दे दिया लोग.....आऊर तो आऊर ..हमको सब लात मार के निकाल दिया..फ़िर भी देखिये कितना शांत बैठे हैं...अब तो नितिश जी को भी नहीं गलियाते हैं..तो शांति का नोबेल -ग्लोबेल जो भी था ..हमरे नाम ही होना चाहिये था जी...


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खबर :-कोडा खा गये चार हज़ार करोड...

नज़र :- जे बात ...अब लगा न कि ई राज्य बिहार से निकला था...जब से झारखंड बना था ...एक दम नीरस और बकवास बन के रह गया था....बस कुछ नहीं तो..मुख्यमंत्री-मुख्यमंत्री खेल रहा था...कौनो एडवेंचर था ही नहीं...अब जब पता चला है कि ..मुख्यमंत्री कोडा....अरे पता किजीये तो..इनका नाम कहीं ..करोडा तो नहीं था....पूरे चार हज़ार करोड खा कर हज़म कर गये..मन बाग बाग हो गया...देखिये जी अब ई नहीं कहियेगा कि काहे..यदि मन बाग बाग हो रहा है तो अच्छे है न..ग्लोबल वार्मिंग कम होगा...और ईतना तो बढिया है न कि मान लिजीये कल को देश में मंदी जादे हो जाता है...तो लालू जी. कोडा जी, सत्यम जी ..और बस कुछ छोटा मोटा लोग को काट कर इनके पेट से इतना पैसा निकाला जा सकता है कि अपना तो अपना ..अमरीका का मंदी भी भाग जायेगा..

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खबर:-राष्ट्रमंडल के खेल प्रतिनिधियों की खूब हो रही है खातिरदारी....

नज़र :-..देखा हमारी खेल नीति कितनी स्पष्ट और पारदर्शी है..अपनी खेल परियों..खेल देवताओं, खिलाडियों...और खेल से जुडे तमाम लोगों का चाहे अपमान हो जाये..चाहे उन्हें खून के आंसू रोना पडे....चाहे खेल के कारण उनका पूरा भविष्य चौपट हो जाये...मगर इसका ये मतलब नहींम कि अधिकारियों को हम किसी तरह का कष्ट होने दें...खास कर जब वे विदेशी हों....ऊपर से इंस्पेक्शन पर आये हों..अजी उषा का क्या है....और फ़िर ये रोना धोना तो चलता ही रहता है...वैसे भी ये हमारी राष्ट्रीय खेल नीति का अहम हिस्सा है....देखिये आप लोगों कि दुआ से इस बार कितने पदक मिलते हैं....वैसे तैयारी तो पूरी की है हमने..अजी खेलने की नहीं....कमाने की...
हालांकि प्रतिनिधियों ने कहा है कि वे संतुष्ट नहीं हुए हैं...यदि उन्हें भी एक वकील मुहैया करा देती सरकार तो वे भी खुद को ..कसाब की तरह ..खास मेहमान बनने की अनुभूति पाते...बेचारे उन्हें कहां नसीब हो सकता है ..वो सुख...
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खबर :-दिवाली पर तोहफ़ा सस्ते होम लोन का ..

नज़र :- मैं तो तभी समझ गया था कि जो सरकार अभी तक .....टैण टैणेण की जगह ..सिर्फ़ जय हो जय हो ही गा रही है....यानि साफ़ है कि अपडेटेड नहीं है.....वो सरकार ऐसे ही ओल्ड फ़ैशन्ड निर्णय ही तो लेगी न......आप ही बताईये आज एक..... कैटल क्लास ...(कमाल का नया शब्द और पहचान दिलाई है थरूर साहब ने...मैं तो कहता हूं सिर्फ़ इन दो शब्दों के कमाल के उपयोग के लिये ही उन्हें साहित्य का नोबेल मिल जाना चाहिये था..मगर नोबेल वालों ने शांति का नोबेल भी पता नहीं कैसे तो.....खैर छोडिये इसे....) का सबसे बडा सपना क्या है...सिर्फ़ यही कि ..चाहे वो झुग्गी में रहता हो ..या फ़ुटपाथ पर सोता हो..चाहे वो ताज में खाये या ओबेराय में...काश कि दाल मिल जाये....और अब तो प्याज भी सेलिब्रिटी सी हो रही है....मुई चढती ही जा रही है....ऐसे में यदि लोगों को किसी चीज के लोन दिया जाना चाहिये तो वो है दाल...सिर्फ़ और सिर्फ़ दाल..आप खुद ही देखिये न कौन सी बिल्डिंग इन दालों की फ़ोटू के समान सुंदर होगी.......

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खबर :-पेशावर में बम धमाका ..

नज़र :- लो जिसका डर था वही हुआ...मैं न कहता था कि इन ससुरों को जादे पैसे मती दो सैम अंकल...क्योंकि ये तो खाली बम ही बनाते हैं पैसों से ..और कुछ तो करते नहीं...बना लिये होंगे क्विंटल के भाव से...अब इस बार दिवाली में ..हमारे यहां तो चीनी भाई अपनी फ़ैक्ट्री के बम पटाखे बेच रहे हैं..बेचारे किसी तरह अपने चाउमीन का जुगाड कर रहे हैं...सो पाकिस्तान वाले बमों की खपत तो यहां इस बार हो नहीं पायेगी .....इस बार उनका एक डेडिकेटेड बच्चा ..कसाब..अपने यहां मेहमान है न...तो ये तो होना ही था..बम हैं तो फ़ूटेंगे ही....काश कि ये कोई समझ पाता कि....बम ..देश, मजहब, जाति..नहीं पूछते ...फ़टने से पहले....न ही मौत पूछती है....

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आज के लिये इतना ही ..बकिया समाचार आप टीवी में भी तो देखिये न...